

कृषि विज्ञान केंद्र जाले के पौध संरक्षण वैज्ञानिक उन्होंने बताया कि बारिश के कारण तापमान में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट हुई है। इस बारिश से आम और लीची पेड़ में लगे फसल को फायदा पहुंचेगा।
जिले में अधिकांश लीची व आम के बागों में फल पकने की अवस्था में आ चुकी है, इस बारिश से इन फलों को पकने में सहायता मिलेगी। यह बारिश मूंग, मडुआ, तिल एवं सब्जी वाली फसलों के लिए लाभदायक है। साथ ही बारिश के कारण जगह जगह पर जलजमाव से लोगों को थोड़ी परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि वैसे किसान जिनकी खेत खाली है तथा उसमें खरीफ धान की नर्सरी समय से लगाना चाहते हैं। वैसे किसान भाई खेत की तैयारी शुरू कर दें।
साथ ही स्वस्थ पौधे के लिए नर्सरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल करें। संभव हो तो नर्सरी में बिछड़ा लगाने के लिए उपचारित बीज का ही प्रयोग करें इससे कीट एवं रोग व्याधि से निजात मिलेगी।
उन्होंने बताया कि जैसे ही आम पकना शुरू होगा फल-मक्खी का प्रभाव देखने को मिलेगा अतः कृषकों को यह सुझाव दी जाती है की फल मक्खी के नियंत्रण हेतु अपने बागों में मिथाइल यूजीनाॅल का प्रयोग करें।


