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फ़रवरी, 12, 2026
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Darbhanga की शांत पानी में उगने वाला, कड़ाही की तेज आंच पर भूनते-निकलने वाला, देवताओं का प्रिय मखाना अब बनेगा Center Of Excellence

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दरभंगा (Darbhanga) की शांत पानी में उगने वाला, कड़ाही की तेज आंच पर भूनते-निकलने वाला, देवताओं का प्रिय मखाना अब बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Center Of Excellence)। इसकी तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है।

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जानकारी के अनुसार, दरभंगा अब मखाना बहुत बड़ा उत्पादन केंद्र बनने जा रहा है। दरभंगा में मखाना का विशिष्ट केंद्र बनेगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है। इसके साथ ही दरभंगा मखाना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Center Of Excellence) बन जाएगा। इसके लिए डीपीआर बनाया जा रहा है।

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जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसेक लिए गया में मोटे अनाज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यानी विशिष्ट केंद्र का निर्माण होगा। वहीं, दरभंगा में मखाना का विशिष्ट केंद्र बनेगा।

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बिहार में चौथे कृषि रोड मैप में पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) को मंजूरी दी गई है। कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने बताया कि वैशाली के राघोपुर में पान का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा। इसी तरह बांका में शहद, दरभंगा में मखाना और किशनगंज में चाय का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाना है।

इन सबके लिए डीपीआर बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गया कि टनकुप्पा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के निर्माण के लिए 52 एकड़ जमीन चिह्न्ति कर ली गई है। कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने कहा कि मोटे अनाज के लिए बनने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का डीपीआर बन रहा है।

यहां किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा तथा कम पानी में बेहतर सिंचाई और तालाब का मॉडल भी बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि गया, नवादा और औरंगाबाद में तिल की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तिलकुट निर्माण के लिए प्रसिद्ध गया में स्थानीय तिल से ही तिलकुट बनेगा।

इसके अलावा ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का की फसल लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक खेती की भी सरकार ब्रांडिंग करेगी। उन्होंने कहा कि किशनगंज में उत्पादित चाय की राज्य सरकार ब्रांडिंग करेगी। इसकी योजना बनाई जा रही है।

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दरभंगा के मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा मिलने से अब यहां कृषि वैज्ञानिकों की सुविधाओं में वृद्धि होगी।

मखाना अनुसंधान केंद्र से राष्ट्रीय दर्जा छिन जाने के बाद, अनुसंधान की गतिविधि धीमी हो गई थी। बावजूद इसके इस केंद्र के वैज्ञानिकों ने मखाना की न सिर्फ पहली प्रजाति स्वर्ण वैदेही को विकसित किया।

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साथ ही, यहां मौजूद आधारभूत संरचनाओं का विकास होना निश्चित है। इससे जलीय फसल की उत्पादन क्षमता विकसित होने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के मानकीकरण

के लिए बुनियादी रणनीति तय होने और कारगर अनुसंधान के रास्ते खुल गए हैं। एक जिला, एक उत्पाद योजना के तहत दरभंगा का चयन मखाना के विकास के लिए किया गया। अब दोबारा इसे राष्ट्रीय दर्जा मिलने से फिर से विकास में गति आएगी।

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