



दरभंगा,देशज टाइम्स। कलम की धार ही पत्रकार की वास्तविक पहचान है।पत्रकारिता में साहस, धैर्य व संयम जैसे गुण ही संवदेनशील व जिम्मेदार बनाते हैं। भाषा, विचार, विषय व संवाद ही पत्रकारिता की परिभाषा, दशा और दिशा तय करते हैं।
पत्रकार हूं, संवेदना लिखता हूं.. कभी दर्द तो कभी सच लिखता हूं.. फिर भी कई बार शोषित हो जाता हूं। कई बार उलाहनाएं भी झेलता हूं.।.पत्रकार हूं, संवेदना लिखता हूं..। तुम्हारी चाहत की कलम खिलाता हूं.. कभी रेसिपी तो, कभी सुंदरता बटोरता हूं.। ऐसे में,पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के लिए विकासात्मक पत्रकारिता की आज जरूरत है।
इसमें प्रिंट के साथ इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया भी शामिल हैं। पत्रकार को केवल संघर्षरत क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि हर समय तथा हर विषय की रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता व उत्तरदायी होने का प्रमाण प्रस्तुत करना चाहिए। मगर हो क्या रहा है। पत्रकारिता के नाम पर जिन शब्दों का आज समाज व सामाजिक लोग प्रयोग कर रहे हैं उसके लिए हम पत्रकार ही जिम्मेदार हैं।
पत्रकारिता का बिना मतलब साधे, हाथ में कैमरा, बैग व बाइक पर सवार होकर सुबह बिना खाए पिए घर से निकल जाना कि चलो कहीं ना कहीं तो दावत फंसा ही लेंगे कि मंशा पत्रकारिता खासकर दरभंगा के मायने में काफी लोभी व विकराल दैत्याकार में बढ़ने लगा है।
इसपर रोक अति जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को आगे आना चाहिए। इस विकट संकट में प्रशासन को यहां के विभाग को सचेत व जागरूक होते हुए एक सार्थक समाधान की दिशा में कठोर कदम उठानी चाहिए जिससे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मजबूत, निर्भीक व ईमानदारी के साथ आगे बढ़ सके।







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