

प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान देशज टाइम्स। मानसून के समय में ही क्यों शुरू होती है मनरेगा से सड़क निर्माण कार्य वो भी जेसीबी और ट्रैक्टर से।
आखिर क्या मंशा है मनरेगा के कर्मी और पदाधिकारियों की। कब तक मनरेगा वाले मजदूर की पेट पर लात मारते रहेंगे। मजदूरों की जगह मशीनों से कब तक होगा सड़क का निर्माण कार्य।
जी हां कुशेश्वरस्थान में यह आम बात है। मनरेगा में बस एक ही नियम चलता है। वह नियम है लूट सको तो लूट लो। मनरेगा में मची है लूट।
एक और नया मामला और कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के इटहर पंचायत के जिमराहा से सामने आया है। जिमराहा के राजीव कुमार राय ने मनरेगा के पीओ को इसकी लिखित शिकायत की है। शिकायत में लिखा गया कि पूरे इटहर पंचायत में दर्जनों योजना चलाया जा रहा है।
कई योजना पर मजदूर के स्थानों पर जेसीबी और ट्रैक्टरों से काम किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर समौरा में राजीव साह के डेरा से रामकुमार साह की खेत तक मिट्टीकरण एवं जिमराहा में पुरुषोत्तम राय के खेत से राम सागर राय के खेत तक एक टोकरी मिट्टी नही डाली गई। और, दोनों योजनाओं पर एमआर लगा दिया गया है।
यहां मनरेगा से ज्यादातर कार्य मानसून के समय ही किया जाता है ताकि बिना काम किये जेब गरम किया जा सके। कुशेश्वरस्थान बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है और इसी का फायदा उठाकर मनरेगा से कागजों पर सड़क बना राशि की निकासी कर ली जाती है।
इस संबंध में पीओ संदीप कुमार ने आवेदन प्राप्त होने का पुष्टि करते हुए कहा कि योजना का स्थलीय जांच कर दोषी पाए जाने पर अभिकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए भुगतान पर रोक लगा दिया जाएगा।



