किसानों को वैज्ञानिकों ने बताया कि जिले में बारिश के अभाव से खरीफ की फसलें प्रभावित हो रही हैं। वहीं लगातार सूखे के बाद हल्की बारिश से खरपतवारों में काफी वृद्धि देखने को मिल रही है। इसकी वजह से मुख्य फसल की विकास बाधित हो रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने बताया कि जिन किसानों ने बारिश के अभाव के कारण अभी तक किसी भी फसल की बुवाई नहीं की है। वह अपने खाली पड़े खेतों के लिए अन्य आकस्मिक फसल का चयन कर सकते हैं।
इसके अलावा मोटे अनाजों में सांबा, चीना और कोदो की फसल का भी चयन उत्तम होगा। खरीफ दलहनी (राजमा, अरहर, उड़द इत्यादि) फसलें भी किसान लगा सकते हैं।
ध्यान देने योग्य बात है कि इन खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव के 24 घंटे के अंदर खेतों में नमी होना आवश्यक है। इस कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना के शोध सहायक अभिषेक रंजन उपस्थित रहे।







