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फ़रवरी, 25, 2026
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Madhubani के बेनीपट्टी में करोड़ों खर्च के बाद भी कमला नहर किसानों के लिए बना सिरदर्द, टूटे पड़े हैं नाले, क्षतिग्रस्त नालों से हजारों एकड़ में सिंचाई ठप

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धुबनी के बेनीपट्‌टी में करोड़ों खर्च हो गए मगर, कमला नहर का नाला आज भी क्षतिग्रस्त पड़ा है। हजारों एकड़ भूमि में सिंचाई व्यवस्था इससे पूर्णतः ठप है। इस बीच, किसानों ने चेतावनी है, जल्द पटवन व्यवस्था नहीं हुई शुरू तो सड़क पर उतरेंगे साथ में फोटो भी देखिए, कैसे जंगलों से पटा पड़ा है कमला नहर का नाला। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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बेनीपट्टी, मधुबनी देशज टाइम्स। कमला नहर के नाला क्षतिग्रस्त होने से आधा दर्जन गांवों के हजारों एकड़ भूमि में सिंचाई व्यवस्था पूर्णतः ठप पड़ा हुआ है। बावजूद विभाग और वरीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

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सिंचाई सुविधा बंद होने पर सैकड़ों किसान आक्रोशित होकर आंदोलन करने की रूपरेखा बना रहे हैं। बता दें कि पुरानी कमला नहर किंग्स केनाल जो जयनगर स्थित कमला नदी से निकलती है, उस नहर को पश्चिमी कोशी नहर के वितरणी शाखा से मनमोहन गांव के पास जोड़ा दिया गया है।

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मुख्य नहर से अरेर लक्ष्मीपुर के पास साइफन से एक चैनल बना हुआ है, वह सतलखा गांव तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराता है। विगत तीन वर्ष से चैनल के कई हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर पड़ा हुआ है। इसके कारण नाला में एक बूंद पानी पटवन के लिए नहीं है।

लक्ष्मीपुर अरेर से महज कुछ दूरी तक नहर के फाटक से पानी आता है। लेकिन अरेर पूरब टोल, बिजलपुरा,कमराही,कोनस, पौना, श्रीरामपुर लकसायर, सतलखा,बैलौंजा,नागदह एवं हुसैनपुर आदि गांवों के बधार में सिंचाई सुविधा तहस नहस हो गया है।

अरेर गांव के किसान नारायण झा,अमरनाथ झा, अनिल मिश्र,सरोज मिश्र, विवेकानंद मिश्र सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री, डीएम, कार्यपालक अभियंता सहित अन्य वरीय अधिकारियों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर कई बार आवेदन देकर व मौखिक रूप से भी फोन कर जानकारी देते हुए सकारात्मक व ठोस पहल करने के लिए गुहार लगायी गयी।

लेकिन, आज तक किसी ने भी किसी प्रकार की सकारात्मक पहल नहीं की है। पहले उक्त सिंचाई योजना अरेर, बिजलपुरा, नागदह, पौना सहित कई राजस्व गांवों में पटवन के लिए मिल का पत्थर साबित होता था।

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विगत पांच वर्ष में नहर के मरम्मत एवं नाला में उगे हुए जंगलों की साफ सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए फूंक दिये गए। फिर भी सिंचाई योजना की स्थिति बद से बदतर ही है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि करोड़ों रुपए की बड़ी राशि खर्च कर मरम्मती और सुदृढ़ीकरण के नाम पर महज खानापूरी की गयीं और राशि संबंधित अधिकारी व कर्मी गटक गए।

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इतना ही नहीं भाकपा के वरिष्ठ नेता मिथिलेश झा एवं मनोज मिश्रा ने भी कार्यपालक अभियंता से सिंचाई सुविधा नदारद रहने शिकायत की थी, बावजूद वे नींद से नहीं जागे। वर्तमान में मुख्य नहर में पानी बह रहा है।

लेकिन उप वितरणी शाखा के नाला में पानी का बहाव पूर्णतः ठप हो गया है। किसानों ने बैठक कर निर्णय लिया है कि इस सुखाड़ की परिस्थिति में सिंचाई विभाग पटवन का प्रबंध करने में उदासीनता बरत रही है। अगर जल्द से जल्द पटवन व्यवस्था सुदृढ़ नही की गयी तो हम सभी किसान सड़क जाम एवं प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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