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फ़रवरी, 12, 2026
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Madhubani में राजा पद्म सिंह की राजधानी पद्मा का भूत स्वर्णिम, वर्तमान बदहाल, कौन संवारेगा भविष्य, सबसे बड़ा सवाल!

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लदनियां, मधुबनी देशज टाइम्स। प्रखंड क्षेत्र के पदमा पंचायत के पदमा गांव में आज से सैंकड़ों वर्ष पूर्व राजा पद्म सिंह की राजधानी पद्मा जिसका भूत स्वर्णिम और वर्तमान बदहाल है। भविष्य कौन संवारेगा यही सबसे बड़ा सवाल है। 

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पद्मा धरहरवा डीह जिले के लदनियां प्रखंड अंतर्गत इंडो-नेपाल सीमा के समीप अवस्थित है। जो मैथिली साहित्य में धरोहर के रूप में जाना जाता है। धरहरबाडीह को ही कुछ लोग गोन्हाडीह के नाम से जानते हैं। जो पुरातत्व विभाग द्वारा पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में सरकार की ओर से कोई भी सार्थक पहल नहीं होने से लोगों में निराशा है।

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जैसा कि पद्मा गांव स्थित धरहरबाडीह पद्मा मौजा के खाता संख्या 563 खेसरा संख्या 3128 में अवस्थित है। उक्त आम जमीन खेसरा का कुल रकबा 1.78 डिसमल है। इसमें 81 डी जमीन बिहार सरकार के नाम से अभिलेख इंद्राज है।

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शेष आम भूमि को रैयतों के नाम से वितरित कर दिया गया है। अभिलेख जांच से ही सच्चाई सामने आएगी आखिर किस परिस्थिति में सरकार के प्रावधान के विपरीत लोकभूमि की बन्दोबस्ती की गई।

पद्मा ऐतिहासिक धरहरबाडीह के सम्बंध में मिथिला महात्म, मैथिली साहित्य दर्पण, मिथिला दिग्दर्शन, मैथिली साहित्य का इतिहास सहित बिहार ग्रन्थ राज्य अकादमी पटना से प्रकाशित डॉ. बजरंग वर्मा ने विद्यापति दर्शन नामक पुस्तक में स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

पं. दुर्गनाथ झा श्रीश ने मैथिली साहित्य के इतिहास में धरहरबाडीह के संबंध में लिखा है। वैसे कई विद्वानों ने अपने आलेख में पद्मा गांव का नामकरण राजा शिव सिंह के भाई पद्म सिंह के शासनकाल में उनकी रानी पद्मावती के नाम पर किया गया है।

उक्त डीह के दक्षिण में डेंगराही पोखरा है। लोगों का कहना है कि उक्त पोखरा में राजघराने के लोग जलक्रीड़ा करते थे। राजा पद्म सिंह के शासनकाल में राजा शिव सिंह के साथ महाकवि विद्यापति ठाकुर पद्मा गांव कई बार पदार्पण कर चुके थे।

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पद्मा योगिया गांव के बीच धौरी नदी पर एनएच 227 ( 104) के सटे उत्तर में धौरी नदी का उद्गम है। उक्त नदी का नामकरण बाबा धौरब मुनि के नाम पर किया गया था। डॉ. इन्द्रशेखर झा ने उक्त डीह के संबंध में अपने लिखे पुस्तक मिथिला दिग्दर्शन में भी विस्तार पूर्वक लिखा है।

डॉ. बजरंग वर्मा ने अपने पुस्तक विद्यापति दर्शन में उल्लेख किया है कि प्रसिद्ध राजा चन्दरकर के प्रभु अमृतधर ने अपने ईस्टेट गजरथपुर से हटाकर पद्मा नाम के स्थान पर ले गये।राजा शिवसिंह के भाई पद्म सिंह बड़े दानी और पंडित थे।

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पद्मा गांव के राजा पद्म सिंह के धरहरबाडीह पर कई अवशेष लोगों को मिले। जिस ओर पुरातत्व विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया। मगर प्रयास अभीतक सफल नहीं हो सका।
पुरातत्व विभाग के निर्देश पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मंजू देवी एवं पूर्व सीओ सरयुग दास ने संयुक्त रूप से स्थल जांच की।

जांच रिपोर्ट विभाग को सुपुर्द कर दिया। विडंबना है कि उक्त ऐतिहासिक स्थल को पुरातत्व विभाग की ओर से पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के प्रति गंभी नहीं है।

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