

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की पूरी कोशिश हो रही है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास का प्रतिफल भी दिखने लगा है। अभिभावकों से बच्चों को स्कूल नियमित भेजने की अपील और शिक्षकों समेत हेडमास्टर और अन्य संसाधनों से स्कूलों का माहौल बेहतर बनाने का प्रयास लगातार जारी है।
इसी कड़ी में नया आदेश शिक्षा विभाग की ओर से आया है जाे स्वागत योग्य है। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में अब हर सप्ताह बच्चों का मूल्यांकन किया जाएगा। यह व्यवस्था सितंबर से शुरु होगी।
वहीं, कक्षा एक से आठ तक के बच्चों का प्रत्येक महीने मूल्यांकन (जांच परीक्षा) किया जाएगा। बच्चों का मूल्यांकन सितंबर से शुरू होगा। इसकी तैयारी अगस्त माह से ही शुरू कर दी गई है। कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों का मूल्यांकन अलग-अलग होगा।
वहीं, महीनें के आखिरी शनिवार को शिक्षक और अभिभावकों की बैठक होगी। यह व्यवस्था नई है और अमूमन सरकारी स्कूलों में देखने को नहीं मिलती थी। इससे अभिभावक अपने पाल्या की रिपोर्ट और पढ़ाई के स्तर से अनभिज्ञ रहते थे। ऐसा होने से अब अभिभावक भी सजग होंगे।
इसके लिए इस माह के अंत तक मासिक मूल्यांकन की रिपोर्ट सभी स्कूलों को तैयार करानी है। इसके साथ ही स्कूलों की ओर से किए गए मासिक मूल्यांकन में बेहतर ग्रेड पाने वाले बच्चों की सूची नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी।
जानकारी के अनुसार, अब इसके तहत सरकारी स्कूलों में छठी से लेकर बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं का साप्ताहिक मूल्यांकन होगा।
इससे संबंधित निर्देश बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक बी. कार्तिकेय धनजी ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों और माध्यमिक शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा एवं एसएसए के प्रभार वाले जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को दे दिए हैं।



