

जो मूल खबर है कि अब बिहार में कर्मियों के साथ कोई भी अधिकारी अमर्यादित व्यवहार नहीं कर पाएंगें। ऐसा करना अधिकारियों पर भारी पड़ने वाला है क्योंकि बिहार सरकार ने इसको लेकर फरमान जारी कर दिया है।
लेकिन पहले उस कविता की बात जो वैशाली के शिक्षक पूर्णानंद मिश्र ने लिखे हैं, मामला केके पाठक के निरीक्षण से जुड़ा हैं। शिक्षक के साथ व्यवहार पर मिश्र ने व्यंग्य में कविता तक लिख दी है कि शरीर तो मोटा भी चलता है हुजूर, पर ,जुबान मोटी नहीं होनी चाहिए…इसी को देखते सरकार का यह फरमान आया है। पढ़िए पूरी खबर आखिर केके पाठक के निरीक्षण में क्या हुआ था फिर बताते हैं आज सरकार का नया आदेश क्या आया है…
पटना से सटे वैशाली जिले के हाजीपुर में 11 अगस्त को शिक्षा विभाग के अपर सचिव केके पाठक निरीक्षण निरीक्षण के क्रम में केके पाठक ने हाजीपुर उत्क्रमित मध्य सेन्दुआरी के एक शिक्षक को हाथी कह दिया। उन्होंने कहा कि हाथी की तरह मोटा हो गया है, इडियट, प्रिंसिपल काम कर रहा है तुम खड़ा हो। जल्दी जाओ और सामान बाहर लाओ।
केके पाठक का शिक्षक के प्रति किए गए इस व्यवहार से कई शिक्षक नाराज हैं। वहीं, शिक्षक पूर्णानंद मिश्र ने इस डिस्क्लेमर के साथ कि इस कविता को कोई अपने दिल पर न ले, इशारों-इशारों में शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों पर कविता के माध्यम से करारा प्रहार किया है, कि शरीर तो मोटा भी चलता है हुजूर, पर ,जुबान मोटी नहीं होनी चाहिए…।
खैर, सरकारी फरमान नया यह है कि,बिहार के सरकारी कार्यालयों में ऊंचे पदों के अधिकारी अपने कार्यालयों के कर्मियों से अर्मादित व्यवहार नहीं करें। बिहार सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि ऐसे अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
कई मामले सुर्खियों में रहे हैं। इसमें आइपीएस विकास वैभव से लेकर कई अधिकारी शामिल हैं। ऐसे में सरकार ने कहा है कि अक्सर शिकायतें मिलती थी। इसके बाद बिहार सरकार ने इसपर एक्शन लेने का फैसला किया है।
विभिन्न कार्यालयों में पदस्थापित उच्च पदाधिकारियों की ओर से अपने अधिनस्थ कर्मियों के साथ अमर्यादित व्यवहार की शिकायतें अब गंभीर रूप से ली जाएगी। उनके प्रति प्रतिदिन असंसदीय भाषा का प्रयोग कर उन्हें अकारण मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, बात-बात पर
अनावश्यक एवं अकारण निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने जैसी कार्रवाई की जा रही है। जिसकी शिकायत लगातार शिकायत की जा रही थी। इसके बाद से बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया बिहार सरकार ने कहा है कि ऐसे अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 (समय-समय पर यथा संशोधित) गठित की है। इस नियमावली के नियम–3 (1) से प्रत्येक सरकारी सेवकों के प्रसंग में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि- पूरी शीलनिष्ठा रखेगा, कर्तव्य के प्रति निष्ठा रखेगा और हर सरकारी सेवक सदा ऐसा कोई काम न करेगा जो सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय हो।
साथ ही, सरकार के संज्ञान में ऐसी बातें आ रही हैं कि विभिन्न कार्यालयों में पदस्थापित उच्च पदाधिकारियों की ओर से अपने अधिनस्थ कर्मियों के साथ अमर्यादित व्यवहार करने, और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। और, अकारण मानसिक रूप से प्रताडित करने, बात-बात पर अनावश्यक एवं अकारण निलम्बन एवं विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने जैसी कार्रवाईयों की जा रही हैं।


