

बाढ़ ग्रस्त इलाका है दरभंगा का कुशेश्वरस्थान। यहां यातायात की इन दिनों काफी परेशानी हो जाती है जब सैलाब रास्तों को अवरूद्ध कर बैठा है। लोगों की यह परेशानी भी है और टेंशन की वजह भी।
यह टेंशन उस वक्त और टिस मारता है जब परिवार का कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है और लोग उसे खटिया पर लादकर इलाज कराने के लिए अस्पताल ले जाते हैं और फिर उसे नाव से ही पर कर घर लौट लौटते हैं। रितेश कुमार सिन्हा की यह खास रिपोर्ट…
कुशेश्वरस्थान में कमला-बलान नदी के पश्चिमी तटबंध के पूर्वी हिस्से में अवस्थित प्रखंड के छह पंचायतों में कोसी और करेह नदी के जलस्तर बढ़ने से पांच पंचायतों के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है।
सबसे ज्यादा लोगों को आने जाने के लिए नाव का ही सहारा है। सड़क मार्ग पर पानी चढ़ने से यातायात पूरी तरीके से ठप है। कुशेस्वरस्थान प्रखंड के सिमरटोका पंचायत के उजुआ गांव स्थिति और ज्यादा बत्तर हो गई है।
इस इलाके के लोगो खाने पीने की चीजों से लेकर पशुओं के चारा के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बाढ़ ग्रस्त इलाके में बीमार पड़े लोगों का इलाज कराना मुश्किल हो रहा है। इलाके में बीमार लोगों को लोग खटिया पर लादकर इलाज कराने लिए अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं।
इलाके में खटिया का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि गांव के चारो तरफ बाढ़ का पानी लगा होने से एंबुलेंस या कोई भी दूसरी सवारी गाड़ी गांव तक नही पहुंच पाता है।ऐसे में जब गांव की गर्भवती महिला बीमार हो गई तो चार लोग खटिया को कंधे के सहारे कुशेश्वरस्थान बाजार में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाते हैं। और इलाज के बाद फिर से खटिया में उठा कर नाव से घर लाते हैं। स्वास्थ्य केंद्र भी छोटा है, जहां मरीज को भर्ती भी नहीं लिया जाता है।
ग्रामीण नवीन कुमार बताते हैं कि इस बार बाढ़ ने दूसरी बार हमारे गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। पहली बाद तो तीन चार दिन में पानी गांव से निकल गया था लेकिन इस पानी बहुत ज्यादा आ गया है।
पानी घटने की रफ्तार काफी धीमी है। जिस कारण ग्रामीणों की समस्या बढ़ गई है। इस सरकार की ओर से भी कोई खास ध्यान यहां के बाढ़ पीड़ितों पर नहीं दिया गया है।




