

बिहार के बारह जिलों में यातायात बल स्वीकृत है। शेष 28 जिलों में बल स्वीकृति का प्रस्ताव अंतिम चरण में है। इससे इन जिलों में करीब 4200 अतिरिक्त बल उपलब्ध होगा। यातायात बल पदाधिकारियों एवं कर्मियों की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए एक योजना तैयार की गयी है। इसको लेकर बिहार ट्रैफिक ADG सुधांशु कुमार ने विस्तार से जानकारी दी है। वहीं,परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कहा है कि बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के नई गाड़ी निकली तो शोरूम पर कार्रवाई करेंगे। पढ़िए पूरी खबर
जानकारी के अनुसार,यातायात बल का Age Profile Young हो इसके लिए सिपाही की आयु सीमा अधिकतम 35 वर्ष तय की गयी है। अवर निरीक्षक के स्तर के पदाधिकारी की अधिकतम आयु 40 वर्ष तथा प्रोन्नति से आने वाले हवलदार-सहायक अवर निरीक्षक की अधिकतम आयु 55 साल होगी पुलिस निरीक्षक की अधिकतम आयु 50 वर्ष तय की गयी है।
वहीं, यातायात बल में कर्मियों-पदाधिकारियों का कार्यकाल 03 वर्ष का निर्धारित किया गया है, अर्थात प्रशिक्षण के उपरान्त न्यूनतम 03 वर्षों के लिए उन्हें यातायात कार्यों के लिए लगाया जाएगा एवं अन्य ड्यूटी के लिए स्थानान्तरित नहीं किया जा सकेगा।
एक जिले में पदस्थापना के दौरान वे अधिकतम 03 वर्षो के लिए यातायात ड्यूटी हेतु संलग्न किये जाएगें एवं उस दौरान भी उनके दायित्व-कर्त्तव्य स्थल में फेर बदल किया जा सकेगा ताकि किसी प्रकार की गलत हितसाधना ना हो सके।
यातायात बल के स्वीकृत- उपलब्ध पदों का एक तिहाई महिला बल होना अनिवार्य है। जो राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुरूप है।
यातायात हेतु चुने गये बल के एक पखवारे की अवधि के प्रशिक्षण की व्यवस्था औरंगाबाद में परिवहन विभाग की सहायता से की गयी है एवं अब तक इन बारह जिलों के करीब 500 कर्मी-पदाधिकारी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस वर्ष के अन्त तक बाकी बचे कर्मियों- पदाधिकारियों को भी प्रशिक्षित करा लिया जाएगा।
इन 12 जिलों में 15 नौजवान पुलिस उपाधीक्षकों की पदस्थापना की गयी है और इन्हें बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर पाँच दिवसीय प्रशिक्षित उपरान्त हैदराबाद शहर की यातायात व्यवस्था को समझने के लिए परिचयात्मक दौरे पर भी भेजा गया है।
जिले में कुल स्वीकृत बल का 70% नियमित डीएपी से भरा जाना है, शेष 30% रिक्ति नौजवान गृहरक्षकों से भरे जाने की प्रक्रिया जारी है।
यातायात के अपर पुलिस महानिदेशक ने आगे बताया कि यातायात हेतु चुने गए बल की प्रशिक्षण की व्यवस्था एक पखवारे की अवधि के लिए चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, औरंगाबाद में परिवहन विभाग की सहायता से की गई है।
अब तक इन 12 जिलों के करीब 500 कर्मी, पदाधिकारी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस वर्ष के अन्त तक बाकी बचे कर्मियों, पदाधिकारियों को भी प्रशिक्षित करा लिया जाएगा। इन 12 जिलों में 15 नौजवान पुलिस उपाधीक्षकों की पदस्थापना की गई है और इन्हें बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर में पांच दिवसीय प्रशिक्षण देने के बाद हैदराबाद शहर की यातायात व्यवस्था को समझने के लिए परिचयात्मक दौरे पर भी भेजा गया है।
वहीं, परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि कई जिलों से विभाग को जानकारी प्राप्त हो रही है कि नये वाहनों में एचएसआरपी नम्बर प्लेट लगाये बिना वाहनों की डिलीवरी ग्राहकों को दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि डीलरों द्वारा ऐसा किया जाना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 एवं केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली,1989 तथा मोटर एवं परिवहन विभाग द्वारा निर्गत आदेश की अवहेलना है। नियमानुसार सभी वाहनों में एचएसआरपी लगाया जाना अनिवार्य है।
वाहनों में एचएसआरपी नम्बर प्लेट लगाने की जवाबदेही संबंधित वाहन विनिर्माता एवं उनके डीलर की है। बिना एचएसआरपी नम्बर प्लेट लगे वाहनों की डिलीवरी किये जाने पर वाहन डीलरों का केंद्रीय मोटरवाहन नियमावली, 1989 के नियम 35 के अंतर्गत निर्गत सर्टिफिकेट को नियम 44 के अंतर्गत टेड सर्टिफिकेट निलंबित-रद करने की कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं राज्य परिवहन आयुक्त डॉ. आशिमा जैन ने बताया कि विक्रेताओं द्वारा वाहन की डिलीवरी के पूर्व वाहनों में एचएसआरपी नम्बर प्लेट नहीं लगाए जाने के कारण बिक्री किये गए वाहनों का निबंधन प्रमाण पत्र निर्गत करने में विलंब होता है।
इससे वाहन क्रेताओं को वेवजह समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि बिना एचएसआरपी नम्बर प्लेट लगाए वाहन की डिलीवरी न लें।


