

बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति बीपीएससी ने पूरी कर ली है। सफल अभ्यर्थियों को दो नवंबर को सीएम नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र देंगे। इसके बाद इन नवनियुक्त शिक्षकों की ट्रेनिंग होगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से बीएड पास अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। उन्हें नौकरी नहीं मिलेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ तौर कहा कि 11 अगस्त 2023 के बाद से प्राथमिक स्कूलों में बीएड पास अभ्यर्थी शिक्षक नहीं बन पाएंगे। वहीं, बिहार सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि डीएलएड के अभ्यर्थियों से सारी सीटें भर ली हैं। इसलिए अब बीएड पास अभ्यर्थियों की जरूरत नहीं है। अब हम कोर्ट से रिव्यू की मांग करेंगे।
इसके बाद कोर्ट ने यह साफ़ कर दिया कि प्राइमरी स्कूल में बीएड अभ्यर्थी शिक्षक नहीं बन पायेंगे। सुप्रीम कोर्ट में बीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों के तरफ से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बातें कही गई। वहीं, अब नवनियुक्त शिक्षकों को शहरी क्षेत्र में नहीं मिलेंगी ड्यूटी। पढ़िए पूरी खबर
वहीं, सफल अभ्यर्थियों को दो नवंबर को सीएम नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र देंगे। इसके बाद इन नवनियुक्त शिक्षकों की ट्रेनिंग होगी। ऐसे में संभावना यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ही अधिकतर नवनियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी ताकि वहां के छात्र-शिक्षक अनुपात को भरा जा सके।
राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा प्रशिक्षण मॉड्यूलर तैयार किया गया है। प्रशिक्षण के लिए राज्य के 77 शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों (एससीईआरटी, डायट, सीटीई, पीटीईसी) में व्यवस्था की गई है।
यह ट्रेनिंग 4 नवंबर से शुरू होगी। साथ ही इन शिक्षकों की पोस्टिंग को लेकर तैयारी भी शुरू की जा रही है। इन शिक्षकों की नियुक्ति उन स्कूलों में होगी, जहां शिक्षकों की कमी है। ऐसे में संभावना यह जताई जा रही है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में होगी।
के अनुसार शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में छात्रों के अनुपात में शिक्षक कम हैं। शिक्षा विभाग छात्रों व शिक्षकों के अनुपात को ध्यान में रखकर ही बीपीएससी से नियुक्त शिक्षकों की नियुक्ति करेगा।
बताया जा रहा है कि 9वीं और 10वीं के शिक्षकों के सभी पद उन उत्क्रमित माध्यमिक स्कूलों को दिए गए हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हैं। वहीं, 11वीं और 12 वीं के अधिकांश शिक्षकों के पद भी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ही रिक्त हैं। प्राथमिक स्कूलों में भी यही स्थिति है।


