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दरभंगा की नई सुबह, इल्म की अहमियत से रू-ब-रू होंगे मां के साथ रह रहे कारावास के छोटे बच्चें, सिखेंगे ककहरा

एक सतह पर ये सियाह रात के ख़िलाफ़ जंग के बाद की सुबह। और एक नई जद्द-ओ-जहद के आग़ाज़ का इब्तिदाइया भी।

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दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। दरभंगावासियों के लिए यह खुशखबरी है। हालांकि, इच्छा यही है कोई वहां ना जाए। मगर, पेट की आग, मानसिक उदवेग के कारण अक्सर लोग जेल चले ही जाते हैं। मगर, अब जो जानकारी आ रही है वह बदलाव वाली है।

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कारण, दरभंगा जेल में बंद महिला कैदियों के बच्चे अब पढ़ेंगे। उन्हें प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। ये वैसे बच्चे हैं जो महिला कैदियों के साथ रहने वाले है। और, इनकी उम्र महज तीन से छह वर्ष तक होते हैं तो ऐसे उम्र के बच्चों को अब प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। पढ़िए रितेश कुमार सिन्हा की यह खास रिपोर्ट…

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जानकारी के अनुसार, जिले के दरभंगा मंडल कारा में अपनी मां के साथ तीन वर्ष तक के बच्चे को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए दरभंगा व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी ने डीएम राजीव रोशन एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी समर बहादुर सिंह के साथ बैठक की है।

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यह बैठक उच्च न्यायालय पटना द्वारा संतोष उपाध्याय बनाम बिहार सरकार व अन्य के मामले में पारित आदेश के अनुपालन को लेकर की है।

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दरभंगा मण्डल कारा अधीक्षक स्नेह लता ने बताया

मंडल कारा में अभी तीन वर्ष से कम उम्र वाले अभी तीन बच्चे अपनी मां के साथ है। जिनके लिये जेल में शिक्षा का प्रबंध है और उनके खेलने के लिये खिलौने , उनके चलने के लिए वाकर की व्यवस्था पहले से ही उपलब्ध है।

वही दरभंगा जिला के बेनीपुर उपकारा में बच्चों की संख्या शून्य है। इस सम्बंध में अवर नयायधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रंजन देव ने बताया कि उक्त आदेश के अनुसार गईं वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था जेल में ही कि जानी है।

जबकि तीन वर्ष से छह वर्ष के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था नजदीक के ही विद्यालय की जानी है। वर्तमान समय मे तीन से छह वर्ष तक के एक भी बच्चें अभी कारा में बंद नही है।

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