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Madhubani News| एसपी साहेब…! मोहन दास की जिंदगी बचा लीजिए…

मधुबनी के एसपी सर...मोहन दास की जिंदगी बचा लीजिए। एक मोहन दास करमचंद गांधी था...प्रेम घृणा को जीत लेता था...एक मधुबनी के जयनगर थाना क्षेत्र के राजपुताना टोला का रहने वाला अविवाहित मोहन दास है। इस मोहन दास के पास अपना कुछ नहीं है। चंद जमींन मांगी थी अपनी मां से। भाई और परिजनों ने मिलकर जिंदा जला दिया। अब, मोहनदास की जिंदगी महज दस से बीस फीसद ही शेष है। 29 अप्रैल 2024 को उस पर केरोसिन छिड़कर उसे जिंदा जला दिया गया। मगर, आज तक थाना में FIR तक दर्ज नहीं है। Madhubani Deshaj Times.Com Bureau से Sameer Kumar Mishra के साथ Kumar Gaurav की Reports

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Madhubani News | एसपी साहेब…! मोहन दास की जिंदगी बचा लीजिए…| मोहन दास…एक नाम नहीं है। मोहन दास उस क्रुव्यवस्था का एक पात्र है, जो महज चंद जमीन के लिए अपनी माता और भाई की दरिंदगी के आगे जिंदगी से लड़ रहा है। शेष बची जिंदगी में न्याय की (Madhubani SP Saheb! save mohan das life) उम्मीद लिए भर है। मगर, न्याय मिलेगा? यह बड़ा सवाल है। कारण, कई महीनें बीत गए। आज तक थाने में एक एफआईआर तक दर्ज नहीं है। ऐसे में, उम्मीद है तो सिर्फ एसपी साहेब से…जहां...Madhubani Deshaj Times.Com Bureau से Sameer Kumar Mishra के साथ Kumar Gaurav की यह सामाजिक ताने-बाने को मरोड़ती, अपनों से दुत्कार मिलती यह Reports जरूर पढ़िए जहां…

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Madhubani News| एकबार फिर मधुबनी पुलिस की संवेदनहीनता सामने आयी है

एक बार फिर मधुबनी पुलिस की संवेदनहीनता सामने आयी है। सामाजिक संगठनों के समाज सेवा के खोखले दावे भी सामने आए हैं। मामला, मधुबनी के जयनगर थाना क्षेत्र के राजपुताना टोला से जुड़ा है। इस मोहल्ले के निवासी मोहन दास की जिंदगी 10 से 20 फीसद ही बची है।

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Madhubani News| मोहन दास… क्या अपने पिता के हिस्से की 15 धुर जमींन मांगना गुनाह है…?

पीड़ित मोहन दास की माने तो, मोहन दास की शादी नहीं हुई है। वह अपने पिता व चाचा के हिस्से की 15 धुर जमीन की मांग गुजर बसर के लिए अपनी मां से करते आ रहे थे। इसको लेकर विवाद चला आ रहा था। इस बीच, 29 अप्रैल 2024 को मां किसनी देवी,भाई सोहन दास और भाभो किरण देवी ने भूमि विवाद में आठ बजे रात में घर में केरासिन छिड़कर मोहन दास को जिंदा जला दिया।

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Madhubani News| जिसने देखा था धू-धूकर जलता मोहन दास को…उनसे पूछिए…किस पीड़ा में है जिंदगी

धू-धू कर जलता शरीर लेकर मोहन दास जान बचने के लिए बाहर भागे। मौजूद मोहल्ले के लोगों ने मिलकर आग बुझा दी। जयनगर अनुमंडल हॉस्पिटल ले गए। जहां से उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। डीएमसीएच में भी उसकी चिकित्सा नहीं हुई। तब जाकर निजी हॉस्पिटल में उसका इलाज हुआ।

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Madhubani News| गरीबी, आर्थिक लाचारी, इलाज को मोहताज, जिंदगी बची कहां…क्या इंसाफ मांगना गुनाह है?

गरीबी के कारण आर्थिक तंगी में वापस जयनगर आए। थाने में आवेदन दिया। लेकिन, पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मोहन दास के पास इलाज केलिए पैसे नहीं है। इस कारण पड़ोस की एक महिला के घर पर उसकी चिकित्सा चल रही है।

Madhubani News| हीरा देवी, सशक्तीकरण के साथ शक्ति बनकर सामने है…धमकी के बाद भी…जिंदगी बचाने के लिए जिंदगी दांव पर

पीड़ित की मदद कर रही महिला हीरा देवी की माने तो, आरोपियों से उसको जान से मारने की धमकी मिल रही है। वहीं, जयनगर के एसडीपीओ विप्लव कुमार ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए मामले पर संज्ञान लेने की बात कही। वहीं, जयनगर थानाध्यक्ष अनूप कुमार ने बताया कि मामले पर संज्ञान लिया जा रहा है।

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Madhubani News| सामाजिक संगठन कहां हैं, मदद को हाथ बढ़ाएंगा कौन? मानवता को जिंदा रखने की जिद दिखाएगा कौन?

वारदात के एक माह बीतने को है। और, पुलिस की ओर से मामले में संज्ञान नही लिया जाना मधुबनी पुलिस की कार्यशैली और संवेदनहीनता को दर्शाता है। वहीं, घायल मोहन दास की चिकित्सा के लिए जयनगर के एक भी सामाजिक संगठन अथवा समाजसेवी अब तक आगे नही आए हैं। मोहन दास लाचार है। जिंदगी और मौत से जूझना ही उसकी नियति है।

Madhubani News| अब तक थाना में FIR नहीं होना क्या कहलाता है।

मधुबनी के जयनगर थाना क्षेत्र के राजपुताना टोला निवासी मोहन दास की उम्र कितनी शेष है। यह वक्त के हाथों में है। मगर, 10 से 20 फीसद ही बची उसकी जिंदगी में जहर घोलने वाली मां, दरिंदा भाई और भाभो चंद भूमि के लिए उसकी जिंदगी से खेल गया। हद यह, पुलिस मामले को अलग एंगिल से जोड़ भटकाने की कोशिश में है। 29 अप्रैल 2024 की घटना में अब तक थाना में FIR नहीं होना क्या कहलाता है।

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