श्री हरि ज्योतिष संस्थान के संचालक ज्योतिषाचार्य पं. सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य, चंद्रमा और शनि का विशेष त्रिग्रही योग बन रहा है, जो सफलता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर शिव योग और सिद्ध योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे पूजा-अर्चना का महत्व बढ़ जाता है।
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
मुहूर्त | समय |
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ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 5:17 बजे से 6:05 बजे तक |
सुबह का जलाभिषेक | सुबह 8:15 बजे से 9:05 बजे तक |
अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:35 बजे से 12:35 बजे तक |
पहले प्रहर की पूजा | शाम 6:29 बजे से रात 9:34 बजे तक |
दोपहर का जलाभिषेक | दोपहर 3:25 बजे से शाम 6:08 बजे तक |
रात्रि जलाभिषेक | रात 8:54 बजे से 11:34 बजे तक |
निशिता काल पूजा (26-27 फरवरी) | रात 12:09 बजे से 12:59 बजे तक |
अर्धरात्रि पूजा (26-27 फरवरी) | रात 12:34 बजे से सुबह 3:41 बजे तक |
प्रातःकालीन पूजा (27 फरवरी) | सुबह 4:41 बजे से 6:48 बजे तक |
Mahashivratri 2025 व्रत और तिथि
महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से प्रारंभ होकर 27 फरवरी को सुबह 8:54 बजे तक रहेगी। इस कारण व्रत 26 फरवरी को रखा जाएगा।
Mahashivratri 2025 की पूजा विधि
- व्रत संकल्प: सुबह स्नान कर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग अभिषेक: मंदिर जाकर गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, जायफल, और फल अर्पित करें।
- मंत्र जाप:
- ऊं नमो भगवते रूद्राय
- ऊं नमः शिवाय रूद्राय शम्भवाय भवानीपतये नमो नमः
- रुद्राभिषेक और शिव पुराण पाठ: इस दिन महामृत्युंजय मंत्र जाप और रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व होता है।
- रात्रि जागरण: शिव भक्त महाशिवरात्रि की पूरी रात भगवान शिव की आराधना और भजन-कीर्तन में बिताते हैं।
Mahashivratri 2025 से जुड़े धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिवरात्रि के दिन किए गए रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और जागरण से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।