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31 अगस्त, 2024
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मधुश्रावणी शुरु… टेमी दगाई… सजन घर अयलौँ…लालहि वन हम जायब, फूल लोढ़ब हे…जानिए क्यों करती हैं नवविवाहिताएं नाग-देवता की पूजा

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फूलों, लोकगीतों और नागदेवता की पूजा से सजी मिथिला की लोकपरंपरा — मधुश्रावणी शुरू! देखिए कैसे नवविवाहिताएं इस पर्व को निष्ठा और उल्लास से मना रही हैं…” टेमी दगाई… सजन घर अयलौँ…लालहि वन हम जायब, फूल लोढ़ब हे · आजु ई पाबनि बालमु संग पूजब…मधुश्रावणी महापर्व शुरू: नवविवाहिताएं सजीं सांस्कृतिक परिधानों में, गूंज उठा मिथिला| नागपंचमी पर शुरू हुआमधुश्रावणी पर्व, मिथिला में छाया लोकगीतों का जादू। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी नवविवाहिताएं, मधुश्रावणी ने मिथिला को फिर किया जीवंत। जानिए क्यों करती हैं नवविवाहिताएं नाग देवता की पूजा।@सतीश झा, दरभंगा, देशज टाइम्स।

जब भगवान शिव ने बताया नाग देवियों का रहस्य

श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य से भरा मधुश्रावणी पर्व, 12 दिनों तक चलेगा लोक उत्सव। जानिए मधुश्रावणी की पौराणिक कथा: जब भगवान शिव ने बताया नाग देवियों का रहस्य। 27 जुलाई तक चलेगा मधुश्रावनी पर्व, हर नवविवाहिता के लिए क्यों होता है खास?@दरभंगा, देशज टाइम्स।

मधुश्रावणी पर्व शुरू: मिथिला में नवविवाहिता ललनाओं के कलरव से गूंजा बाग-बगिया

दरभंगा, देशज टाइम्स (DeshajTimes): मिथिलांचल की धरती पर लोकपरंपराओं का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता मधुश्रावणी पर्व मंगलवार से नाग पंचमी के अवसर पर प्रारंभ हो गया है। नवविवाहित ललनाओं के गीत-संगीत और श्रद्धा से भरा यह पर्व पूरे तेरह दिन तक चलेगा, जिसका समापन 27 जुलाई को ‘टेमी दागने’ की रस्म के साथ होगा।

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मधुश्रावणी पर्व की खास बातें एक नजर में

विशेषताविवरण
पर्व अवधि16 जुलाई – 27 जुलाई (13 दिन)
मुख्य पूजननाग देवता और पाँच बहनों की पूजा
व्रत नियमएक समय नमक रहित भोजन, बासी फूलों से पूजा
पूजा स्थलधार्मिक या सार्वजनिक स्थान, समूह में
समापनटेमी दागने की रस्म

फूल, गीत और परंपरा से सजी मिथिला की गलियां

रंग-बिरंगे परिधानों में सजी नवविवाहिता महिलाएं और उनकी सखियां सुबह से ही फूल चुनने निकल पड़ती हैं। इन फूलों से फूल डलिया सजाया जाता है और पूजा स्थल तक गीत गाते हुए झुंड में पहुंचा जाता है। यह दृश्य मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर देता है।

नवविवाहिताओं के लिए विशेष महत्व का पर्व

यह पर्व विवाह के पहले वर्ष में नवविवाहिताओं द्वारा विशेष रूप से मनाया जाता है। वे एक समय बिना नमक का भोजन करती हैं और नियम-निष्ठा से पूजा करती हैं। बासी फूल पत्तियों से नाग देवता की पूजा की जाती है। इस पूजा की पुरोहित कोई बुजुर्ग महिला होती है, जो परंपराओं का संचालन करती है।

श्रद्धा से जुड़ी सर्पदंश से मुक्ति

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने अपने पैरों से कीड़ों को मारने की कोशिश की। तब भगवान शिव ने उन्हें बताया कि ये उनके ही पांच पुत्रियां हैं, जो नाग देवता के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि कलियुग में जो नवविवाहिता महिलाएं श्रावण शुक्ल पक्ष में इनकी पूजा करेंगी, उनका पूरा परिवार सर्पदंश से मुक्त रहेगा।

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पूजा, व्रत, कथा, संगीत, सखी-बहनों का मेलजोल

मधुश्रावणी पर्व केवल नवविवाहिताओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार इसे उत्सव की तरह मनाता है। घरों में पूजा, व्रत, कथा, संगीत, सखी-बहनों का मेलजोल — सब मिलकर एक अद्भुत लोक-सांस्कृतिक माहौल बनाते हैं।

पूरे परिवार के लिए मंगलकारी पर्व

मंगलवार से प्रारंभ हुए इस पर्व को लेकर मिथिलांचल का बाग बगिया ललनाओं के कलरव से गुंजायमान होने लगी है। नवविवाहित ललनाऐं एवं उनके सखी सहेली द्वारा सुबह से चुनकर लाई गई फूल को किसी धार्मिक या सामाजिक स्थल पर पहुंचकर झुंड में रंग-बिरंगे परिधानों में सजधज कर गीत गाती हुई फूल के डलिया को सजाती है जो अपने में आप में एक मनमोहक छटा बिखेर रही है।

मान्यता यही है… जो नव विवाहित कान्या विवाह के प्रथम वर्ष

इस पर्व की यह मान्यता है कि जो नव विवाहित कान्या विवाह के प्रथम वर्ष पांचों बहन नाग देवता का पूजन करेंगी। वह और उनकी पति जीवन भर नाग देवता के कोप से वंचित रहेगी। इस पर्व के महता को देखते हुए इसका विधि विधान बहुत ही निष्ठा पूर्वक की जाती है। इस दौरान नवविवाहिता अपने सशुराल से आये अन्न जल बिना नमक के एक संध्या ही ग्रहण करती है।

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बासी फूल पत्ती से नाग देवता की पूजा

इस पर्व की दो प्रमुख विशेषता है कि प्रथमत: एक दिन पूर्व चुने गये बासी फूल पत्ती से नाग देवता की पूजा की जाती है और दूसरी इस पूजा के पुरोहित भी गाँव की कोइ बुजुर्ग महिला ही होती है। इस पूजा के संबंध में संबंध में किबंदति है

जब भगवान् शंकर ने पार्वती को…

जब माता पार्वती भगवान् शंकर के कथित पुत्री को कीड़ा-मकोड़ा समझ पांव से कुचलने लगी, तो भगवान् शंकर ने पार्वती को उनकी ही पांचों पुत्री के रुप में परिचय करवाते हुए कहा कि यह पांचों बहन नाग देवता है और कलियुग में जो नवविवाहिता श्रावण शुक्ल पक्ष में इनका पूजा अर्चना करेगी उसका पूरा परिवार आजीवन सर्प दंश से वंचित रहेगा।

घर का यह पखवाड़ा उत्सव महोत्सव का माहौल

नव विवाहित इन कन्याओं के घर का यह पखवाड़ा उत्सव महोत्सव का माहौल कायम रहेगी। इसका समापन 27 जुलाई को टेमी दागने की परम्परा के साथ सम्पन्न होगी।

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