
मुजफ्फरपुर के गायघाट में दिल दहला देने वाला हादसा! करंट लगने से मासूम भाई-बहन की मौत। स्टैंड फैन बना मौत का फंदा! मासूम रूद्र और अनुष्का की दर्दनाक मौत।एक ही घर से उठीं दो नन्हीं अर्थियां! बड़ा हादसा
मुजफ्फरपुर के गायघाट में दर्दनाक हादसा: करंट लगने से भाई-बहन की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मां गई थी बाजार, पिता थे काम पर… पीछे से भाई-बहन की दर्दनाक मौत! खेलते-खेलते स्टैंड फैन ने ली जान! दो मासूमों की मौत से रो पड़ा पूरा गांव। मासूम रूद्र और अनुष्का की दर्दनाक मौत।एक ही घर से उठीं दो नन्हीं अर्थियां! करंट से भाई-बहन की मौत, मां-बाप बदहवास@दीपक कुमार।
गायघाट थाना क्षेत्र में हुआ हादसा, गांव में पसरा मातम
मुजफ्फरपुर (गायघाट), देशज टाइम्स – जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के कमरथू गांव में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसमें करंट लगने से दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक बच्चों की पहचान चार वर्षीय रूद्र कुमार और दो वर्षीय अनुष्का कुमारी के रूप में हुई है।
घर पर अकेले थे मासूम, स्टैंड फैन बना मौत का कारण
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को बच्चों के पिता काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे और मां बाजार समान लेने गई थीं। इसी बीच दोनों मासूम भाई-बहन घर पर अकेले थे। घर में रखा स्टैंड फैन, जिसका बिजली का तार नंगा था, से दोनों बच्चे करंट की चपेट में आ गए।
घटना के वक्त किसी को भी इस हादसे की भनक नहीं लगी। जब माता-पिता घर लौटे और बच्चों को बेहोश हालत में देखा, तो उन्हें तुरंत गायघाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
परिवार में पसरा मातम, गांव में गूंजा विलाप
बच्चों की अकाल मृत्यु से माता-पिता पूरी तरह से टूट गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में सन्नाटा और लोगों में गहरी संवेदना है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से आर्थिक मदद और मुआवजा की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन ने जताया शोक, की राहत की घोषणा
घटना की जानकारी मिलते ही गायघाट थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मौका मुआयना किया। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी घटना पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को मदद का भरोसा दिया है।
बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा करंट से हुई मौत पर ₹4 लाख तक की अनुग्रह राशि दिए जाने का प्रावधान है।
बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बिजली सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर देखने में आता है कि पुराने उपकरण, नंगे तार, और अनदेखी के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।
बिजली से जुड़े सुरक्षा उपायों पर काम करने वाली संस्थाएं, जैसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS),बार-बार इलेक्ट्रिकल सेफ्टी को लेकर दिशा-निर्देश जारी करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जागरूकता की भारी कमी है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लोगों की मांग
गांव के लोगों ने मांग की है कि प्रत्येक घर में बिजली सुरक्षा जांच कराई जाए। पुराने उपकरणों को हटाया जाए और सुरक्षित वायरिंग सुनिश्चित हो। बिजली विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जाए।
समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से हादसे का प्रभाव
इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि पूरे गांव को झकझोर दिया। मानवाधिकार और बाल संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) समय-समय पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी करता है।
मौत का जवाबदेह कौन सिस्टम की चूक या लापरवाही?
यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम बच्चों की सुरक्षा को लेकर वाकई गंभीर हैं? अगर घर में थोड़ी सी सतर्कता बरती जाती, अगर नंगे तार की मरम्मत समय पर हुई होती, तो शायद दो मासूम ज़िंदगियाँ आज हमारे बीच होतीं।
सरकार, प्रशासन और आम जनता – तीनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोका जाए। यह एक दुखद सबक है, जिसे अनदेखा करना और भी बड़ी त्रासदी को जन्म देगा।