
भागलपुर. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जब अधिकारियों की टीम औचक निरीक्षण के लिए पहुंची, तो मरीजों के बिस्तरों से लेकर किचन तक में ऐसी गड़बड़ियां मिलीं कि अब पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
यह मामला जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल (JLNMCH), जिसे मायागंज अस्पताल के नाम से भी जाना जाता है, का है. अस्पताल में मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए यह निरीक्षण किया गया. इस दौरान टीम ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को मूलभूत सुविधाएं देने में भी नाकाम साबित हो रहा है, जिससे यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
दवा की किल्लत और भोजन में देरी
निरीक्षण में जो सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात सामने आई, वह थी दवाओं की अनुपलब्धता. अस्पताल के दवा वितरण काउंटरों पर कई जरूरी दवाएं मौजूद नहीं थीं. मरीजों और उनके परिजनों ने शिकायत की कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं उन्हें अस्पताल से नहीं मिल रही हैं, जिसके कारण उन्हें बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. इससे गरीब और कमजोर तबके के मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
दवाओं के अलावा, मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई मिली. निरीक्षण में पता चला कि मरीजों को समय पर न तो सुबह का नाश्ता दिया जा रहा है और न ही दोपहर और रात का खाना. भोजन की गुणवत्ता और वितरण के समय में भारी अनियमितता पाई गई, जो मरीजों के स्वास्थ्य और उनके ठीक होने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है.
अव्यवस्था पर भड़के मरीज और परिजन
अस्पताल में मिली इन गड़बड़ियों ने वहां मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों के गुस्से को और बढ़ा दिया. उन्होंने निरीक्षण टीम के सामने अपनी समस्याओं को रखा और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया. लोगों का कहना था कि वे बड़ी उम्मीद से इस अस्पताल में आते हैं, लेकिन यहां की व्यवस्था उन्हें निराश करती है.
निरीक्षण में सामने आई प्रमुख समस्याएं:
- अस्पताल के दवा काउंटर से आवश्यक दवाएं गायब थीं.
- मरीजों को समय पर और पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा था.
- भर्ती मरीजों के परिजनों ने व्यवस्था को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं.
- अस्पताल के कई हिस्सों में साफ-सफाई का भी अभाव दिखा.
इस औचक निरीक्षण ने मायागंज अस्पताल की आंतरिक कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और अस्पताल की व्यवस्था में कब तक सुधार हो पाता है.








