
भागलपुर न्यूज़.
दावे तो ‘स्मार्ट सिटी’ के हैं, लेकिन शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन ही गंदगी से दम तोड़ रहा है. आखिर हर दिन हज़ारों यात्रियों की सेहत और सम्मान से ये खिलवाड़ क्यों हो रहा है? जानिए इस रिपोर्ट में कि कैसे भागलपुर जंक्शन पर सफाई के सारे दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं.
प्लेटफॉर्म पर कचरे का साम्राज्य
भागलपुर जंक्शन पर कदम रखते ही स्वच्छता के दावों की पोल खुल जाती है. प्लेटफॉर्म नंबर एक हो या चार, हर तरफ गंदगी और कचरे का अंबार लगा हुआ है. खाली पानी की बोतलें, चिप्स के पैकेट और खाने-पीने का बचा हुआ सामान पटरियों से लेकर प्लेटफॉर्म तक बिखरा पड़ा है. कूड़ेदान कूड़े से इस कदर भरे रहते हैं कि कचरा बाहर फैलकर यात्रियों के बैठने की जगह तक पहुंच जाता है, जिससे वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है.
यह स्थिति तब है जब भागलपुर एक प्रमुख जंक्शन है, जहां से रोजाना बड़ी संख्या में एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें गुजरती हैं. यात्रियों का कहना है कि लंबे समय से यही हाल है, लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है. गंदगी के कारण उठने वाली बदबू से यात्रियों को ट्रेन का इंतजार करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
बदबूदार शौचालय और प्रतीक्षालय, यात्री बेहाल
स्टेशन पर बने शौचालयों और प्रतीक्षालय (वेटिंग रूम) की स्थिति तो और भी बदतर है. ज्यादातर शौचालयों में पानी की कमी है और जो नल लगे हैं, वे भी टूटे हुए हैं. गंदगी और भयानक बदबू के कारण यात्री इनका इस्तेमाल करने से कतराते हैं, खासकर महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा मुश्किल होती है. प्रतीक्षालय, जहां यात्री आराम करने के लिए रुकते हैं, वहां भी सफाई का नामोनिशान नहीं है.
यात्रियों को इन प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- शौचालयों में नियमित सफाई और पानी का अभाव.
- टूटे हुए नल, दरवाजे और फ्लश सिस्टम.
- प्रतीक्षालय में फर्श पर फैली गंदगी और धूल.
- मक्खी और मच्छरों का बढ़ता प्रकोप.
ठेका कंपनी की लापरवाही या प्रशासन की अनदेखी?
रेलवे स्टेशन पर सफाई का जिम्मा एक निजी ठेका कंपनी को सौंपा गया है, लेकिन उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. यात्रियों का आरोप है कि सफाईकर्मी कभी-कभार ही दिखाई देते हैं और जो सफाई होती भी है, वह सिर्फ खानापूर्ति के लिए की जाती है. मुख्य प्लेटफॉर्म को छोड़कर बाकी हिस्सों पर तो ध्यान ही नहीं दिया जाता.
अब सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे प्रशासन ठेका कंपनी के काम की निगरानी नहीं कर रहा है? लाखों रुपये के ठेके के बावजूद अगर स्टेशन पर मूलभूत स्वच्छता भी उपलब्ध नहीं है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इस अव्यवस्था के कारण न केवल ‘स्वच्छ भारत मिशन’ का मज़ाक उड़ रहा है, बल्कि भागलपुर शहर की छवि भी धूमिल हो रही है.








