
भागलपुर न्यूज़: गंगा का गुस्सा और सरकार का पैसा, दोनों पानी में बह रहा है? ये सवाल तब खड़ा हुआ जब इलाके के सांसद ने करोड़ों रुपये की एक सरकारी योजना को सीधे-सीधे फिजूलखर्ची बता दिया। मौके पर जायजा लेने पहुंचे सांसद के इस बयान ने अब एक नई बहस छेड़ दी है।
भागलपुर जिले के बैरिया इलाके में गंगा नदी के कटाव की समस्या वर्षों से विकराल बनी हुई है। इसी कटाव को रोकने के लिए चल रही सरकारी परियोजना का जायजा लेने के लिए स्थानीय सांसद मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से बातचीत की। लेकिन निरीक्षण के बाद उन्होंने जो कहा, उसने सबको चौंका दिया। सांसद ने गंगा की धारा को मोड़ने के लिए चल रहे काम को पूरी तरह से फिजूल और जनता के पैसे की बर्बादी करार दिया है।
कटाव रोकने के काम पर उठाए गंभीर सवाल
सांसद ने कटाव निरोधक कार्यों पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस तरह के आधे-अधूरे उपायों से स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदी की धारा को मोड़ना एक अस्थायी व्यवस्था है और इसमें लगने वाला करोड़ों रुपया व्यर्थ जाएगा। उनके अनुसार, यह योजना न तो तकनीकी रूप से बहुत मजबूत है और न ही इससे कटाव की समस्या का जड़ से समाधान हो पाएगा। इस बयान के बाद परियोजना पर काम कर रहे इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों में हलचल मच गई है।
“यह योजना पूरी तरह फिजूल है”
सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस परियोजना के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “गंगा की धारा को मोड़ने का यह प्रयास पूरी तरह से फिजूल है। इससे आम लोगों के टैक्स के पैसे की बर्बादी हो रही है।” उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ और कटाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। सांसद के इस बयान ने कटाव पीड़ितों की उम्मीदों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है, जो इस परियोजना से अपने घरों और खेतों को बचाने की आस लगाए बैठे थे।
करोड़ों की परियोजना पर विवाद
गौरतलब है कि भागलपुर के कई इलाके हर साल गंगा नदी के कटाव का दंश झेलते हैं। सैकड़ों एकड़ जमीन और दर्जनों घर नदी में समा जाते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए सिंचाई और जल संसाधन विभाग ने नदी की मुख्य धारा को आबादी वाले क्षेत्र से दूर करने के लिए डायवर्सन बनाने की परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट की लागत करोड़ों में है। लेकिन अब खुद सत्ता पक्ष के सांसद द्वारा इस पर सवाल उठाए जाने के बाद परियोजना का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस पर पुनर्विचार करती है या काम पहले की तरह ही जारी रहता है।








