
भागलपुर न्यूज़:
गंगा नदी के किनारे बसे गांवों को बचाने के लिए बनाई गई परियोजना पर ही अब सवाल उठने लगे हैं. सरकार जिस गंगा की धारा मोड़ने के काम को कटाव रोकने के लिए ज़रूरी बता रही है, उसी परियोजना को स्थानीय सांसद ने फिजूलखर्ची करार दे दिया है. सांसद के इस बयान के बाद इलाके में नई बहस छिड़ गई है.
मामला भागलपुर के बैरिया इलाके का है, जो पिछले कई सालों से गंगा के कटाव की मार झेल रहा है. इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने गंगा की धारा को मोड़ने की एक परियोजना को मंजूरी दी थी. लेकिन अब इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और इस पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
परियोजना को बताया पैसों की बर्बादी
हाल ही में क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे सांसद ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने कटाव की स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि गंगा की धारा को मोड़ने का यह प्रयास पूरी तरह से फिजूल है और इससे सरकारी पैसे की बर्बादी के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं से जनता को कोई स्थायी लाभ नहीं मिलने वाला है.
सांसद ने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि ज़मीनी हकीकत को समझे बिना इस तरह के प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं, जो अंततः विफल साबित होते हैं. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की.
कटाव पीड़ितों से मिलकर जाना हाल
अपने दौरे के दौरान सांसद बैरिया में कटाव पीड़ितों से भी मिले. स्थानीय लोगों ने उन्हें अपनी समस्याएं बताईं. लोगों ने बताया कि कैसे नदी हर साल उनकी खेती की ज़मीन और घरों को निगल रही है. ग्रामीणों की शिकायतों को सुनने के बाद सांसद ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया.
उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कटाव रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए. सांसद के इस दौरे और उनके बयान के बाद अब यह परियोजना विवादों में घिर गई है. लोगों को अब यह डर सता रहा है कि कहीं यह परियोजना भी भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ जाए और उनकी समस्याएं जस की तस बनी रहें.








