बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक फैसला आया है, जिसने लाखों रैयतों को बड़ी राहत दी है। अब भूमि विवादों का निपटारा न सिर्फ तेजी से होगा, बल्कि अंचलाधिकारियों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी। इस नए नियम से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को अनावश्यक दौड़-भाग से मुक्ति मिलेगी। यह फैसला खास तौर पर म्यूटेशन अपील (दाखिल-खारिज) से जुड़ी शिकायतों और प्रक्रियाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिसमें अब कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
DCLR की होगी सीधी जवाबदेही
राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अंचल अधिकारी (CO) कार्यालयों की कार्यप्रणाली और वहां होने वाले काम के लिए अब उप समाहर्ता भू-राजस्व (DCLR) सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे। इसका मतलब है कि CO कार्यालयों में होने वाली किसी भी अनियमितता या कार्य में देरी के लिए DCLR की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह कदम CO कार्यालयों में पारदर्शिता लाने और उनके कामकाज में सुधार करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे रैयतों को न्याय मिल सके और उनके काम समय पर पूरे हों।
म्यूटेशन अपील में अब सिर्फ डिजिटल पेपर
म्यूटेशन अपील के मामलों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब अपील दायर करते समय केवल डिजिटली हस्ताक्षरित (Digitally Signed) दस्तावेज ही मान्य होंगे। पहले अक्सर यह शिकायत मिलती थी कि लोग मैन्युअल या गैर-डिजिटल प्रतियों के साथ अपील दायर करते थे, जिससे सत्यापन और प्रक्रिया में जटिलता आती थी। इस नए नियम से न केवल प्रक्रिया सरल होगी बल्कि धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी दस्तावेज प्रामाणिक और सत्यापित हों, जिससे भूमि विवादों का निपटारा तेजी से हो सके।
‘सर्टिफाइड कॉपी’ प्रथा पर स्थायी रोक
एक बहुत बड़ी राहत रैयतों को ‘सर्टिफाइड कॉपी’ की प्रथा पर स्थायी रोक लगाने से मिली है। पहले भूमि संबंधी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में लोगों को काफी परेशानी होती थी और इसमें समय व पैसा दोनों बर्बाद होता था। अब इस पुरानी और बोझिल प्रथा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले से भूमि मालिकों को अपने दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह प्रक्रिया को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाएगा और आम जनता के लिए भूमि संबंधी कार्यों को आसान बनाएगा।
लाखों रैयतों को मिलेगी बड़ी राहत
राज्य सरकार के इन फैसलों से बिहार के लाखों रैयतों को सीधा और बड़ा फायदा होने वाला है।
- DCLR की सीधी जवाबदेही से CO कार्यालयों में भ्रष्टाचार और देरी पर अंकुश लगेगा।
- डिजिटली हस्ताक्षरित दस्तावेजों की अनिवार्यता से म्यूटेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रमाणिकता बढ़ेगी।
- ‘सर्टिफाइड कॉपी’ प्रथा के खत्म होने से लोगों का समय और पैसा बचेगा, साथ ही कागजी कार्रवाई में भी कमी आएगी।
यह उम्मीद की जा रही है कि इन सुधारों से बिहार में भूमि विवादों की संख्या में कमी आएगी और रैयतों को अपनी जमीन से जुड़े मामलों को सुलझाने में आसानी होगी। सरकार का यह कदम डिजिटलीकरण और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






