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29 नवम्बर, 2025

महाराजा कामेश्वर सिंह की जयंती: श्रद्धांजलि और समाज सेवा का संकल्प, उठी भारत रत्न की मांग

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दरभंगा न्यूज़: मिथिला की शान, दरभंगा राज के अंतिम शासक महाराजधिराज सर डॉ. कामेश्वर सिंह। उनके नाम में सिर्फ राजशाही नहीं, बल्कि एक युग की दानशीलता और दूरदर्शिता समाई है। उनकी 118वीं जयंती पर रामबाग पैलेस में जो हुआ, वह सिर्फ एक श्रद्धांजली समारोह नहीं था, बल्कि एक महान विरासत को जीवंत करने का संकल्प था।

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मिथिला के गौरव और दरभंगा राज के अंतिम शासक, महाराजधिराज सर डॉ. कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ रामबाग पैलेस में मनाई गई। इस अवसर पर उनके परोपकारी स्वभाव के अनुरूप समाज सेवा के कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और कंबल वितरण प्रमुख थे।

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कार्यक्रम का शुभारंभ दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य संदीप तिवारी जी ने महाराजधिराज के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया। रामबाग परिसर में आयोजित इस गरिमामय समारोह में डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. शीला साहू, डॉ. लाल मोहन झा, डॉ. हेमपति झा और डॉ. अशोक कुमार प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने मंच से महाराजधिराज के कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, दानशीलता और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान की विस्तार से चर्चा की।

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महान विरासत को नमन

जयंती के अवसर पर महाराजा कामेश्वर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा एक विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह की देखरेख में आयोजित इस शिविर में प्रसिद्ध चिकित्सकों ने अपनी निःस्वार्थ सेवाएं दीं। सैकड़ों मरीजों का मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उचित परामर्श और आवश्यक दवाएं वितरित की गईं।

ट्रस्ट के आयोजकों ने बताया कि महाराजधिराज कामेश्वर सिंह स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति सदैव संवेदनशील थे। यह स्वास्थ्य शिविर उन्हीं के सपनों को आगे बढ़ाने और समाज के सबसे वंचित वर्ग तक सहायता पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है।

समाज सेवा का संकल्प

बढ़ती ठंड को देखते हुए, मानवता की सेवा की मिसाल पेश करते हुए, दरभंगा राज परिवार के कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह द्वारा 645 जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरित किए गए। इस अवसर पर कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि समाज सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवता का सर्वोच्च धर्म है। उन्होंने महाराजधिराज के पूरे जीवन को दान और दया को समर्पित बताते हुए कहा कि उनके जन्मदिन पर लोगों की मदद करने से बेहतर कोई उत्सव नहीं हो सकता।

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महाराजा कामेश्वर सिंह के अतुलनीय योगदान को देखते हुए, इस कार्यक्रम में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने देश और समाज के लिए कई असाधारण कार्य किए, जिनकी छाप आज भी स्पष्ट दिखती है।

भारत रत्न की मांग क्यों?

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने अनगिनत शिक्षण संस्थानों को बड़ी मात्रा में दान दिया और उनकी स्थापना में सहयोग किया। इनमें प्रमुख हैं:

  • दरभंगा मेडिकल कॉलेज
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
  • पटना विश्वविद्यालय
  • कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
  • मिथिला शोध संस्थान
  • दरभंगा संग्रहालय
  • दरभंगा एयरपोर्ट (नागरिक उड्डयन के लिए भूमि दान)

अपनी अपार दानशीलता के लिए प्रसिद्ध, महाराज कामेश्वर सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना को लड़ाकू विमान तक दान किए थे, जो उनकी देशभक्ति और उदारता का प्रमाण है।

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राजनीति और समाज सेवा में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वह विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • संविधान सभा के सदस्य
  • मैथिल महासभा के अध्यक्ष
  • हिंदू महासभा के अध्यक्ष
  • स्वतंत्रता के बाद दो बार राज्यसभा सदस्य (1952-58 और 1960-62)

उन्होंने आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाराजधिराज ने 14 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को नियंत्रित किया, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ। इनमें शामिल हैं:

  • चीनी मिलें
  • जूट मिलें
  • प्रेस (जैसे ‘द इंडियन नेशन’ और ‘आर्यावर्त’ समाचार पत्र)
  • ‘दरभंगा एविएशन’ जैसी एयरलाइंस

एक दूरदर्शी व्यक्तित्व

इस भव्य आयोजन में राज दरभंगा के प्रबंधक आशुतोष दत्ता, ट्रस्ट के सह सचिव अमरकांत झा, रमेश झा, रंगनाथ ठाकुर, ठाकुर भूपेंद्र किशोर, सुजीत मल्लिक, प्रदीप गुप्ता, वार्ड 12 पार्षद मुकेश महासेठ, वार्ड 11 पार्षद सोनी पूर्व, सपना भारती, सुजीत मल्लिक, उत्सव पाराशर, डॉ प्रशांत सेतु, राम कृष्ण लाल दास, बबलू, संतोष सिंह, जितेंद्र ठाकुर, अशोक मंडल, राजू मंडल, सुनील रॉय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन राजीव प्रकाश मधुकर ने किया, स्वागत भाषण प्रियांशु झा ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ संतोष कुमार ने किया।

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