दरभंगा न्यूज़: दरभंगा की माटी का वो लाल, जिसने सिर्फ राजपाठ नहीं संभाला, बल्कि अपनी दूरदर्शिता और राष्ट्रप्रेम से इतिहास रचा। देश की आजादी के लिए जब हर तरफ संघर्ष चल रहा था, तब इस महाराज ने अपनी रियासत को भी कुर्बान करने से गुरेज नहीं किया। आज उनकी 118वीं जयंती पर रामबाग पैलेस में भव्य आयोजन हुआ, जिसने एक बार फिर हमें उनके अमूल्य योगदान की याद दिलाई।
महाराजधिराज सर डॉ. कामेश्वर सिंह, दरभंगा राज के अंतिम शासक थे, जिनकी 118वीं जयंती बीते दिन रामबाग पैलेस में पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्तियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम न केवल उनके जीवन और कार्यों को याद करने का एक मौका था, बल्कि उनके द्वारा देश और समाज के लिए किए गए अमूल्य योगदान को भी रेखांकित करने का माध्यम बना।
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महाराजा का अमूल्य योगदान
महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह का नाम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में बड़े सम्मान के साथ दर्ज है। उन्होंने न सिर्फ अपने राज्य की जनता के हित के लिए काम किया, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए चल रहे आंदोलनों को भी भरपूर समर्थन दिया। वे शिक्षा, संस्कृति और समाज कल्याण के प्रबल पक्षधर थे। उनकी दूरदृष्टि ने बिहार सहित पूरे देश में शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं के साथ उनके गहरे संबंध थे और उन्होंने कई मौकों पर राष्ट्रीय कोष में उदारतापूर्वक दान दिया।
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एक ऐसे दौर में, जब देश एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा था, डॉ. कामेश्वर सिंह ने अपनी बुद्धिमत्ता और राजनीतिक सूझबूझ से दरभंगा राज को संभाला। वे केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि एक ऐसे मनीषी थे, जिनकी सोच अपने समय से कहीं आगे थी। उन्होंने दरभंगा में कई ऐसे विकास कार्य कराए, जिनके निशान आज भी मौजूद हैं और उनकी विरासत की गवाही देते हैं।
रामबाग पैलेस में भव्य आयोजन और श्रद्धांजलि
महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती के अवसर पर रामबाग पैलेस में आयोजित समारोह अत्यंत भव्य था। इस दौरान उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और उनके आदर्शों को याद किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे उन्होंने अपने जीवन को लोक कल्याण और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित कर दिया था। यह आयोजन एक भावुक क्षण था, जहां लोग अपने प्रिय महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए एकजुट हुए।
महाराजधिराज सर डॉ. कामेश्वर सिंह का जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। दरभंगा राज के अंतिम शासक के तौर पर, उन्होंने एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो आज भी हमें प्रेरित करती है। उनकी दूरदर्शिता और जनहितैषी नीतियों के कारण वे आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।



