बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई ने हड़कंप मचा दिया है। राज्य के एक पुलिस इंस्पेक्टर, माधव ठाकुर, अब निगरानी विभाग के रडार पर हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद सरकारी गलियारों में खलबली मच गई है।
बिहार पुलिस मुख्यालय स्थित अपराध अनुसंधान विभाग ( कमजोर वर्ग) में तैनात पुलिस निरीक्षक माधव ठाकुर के ठिकानों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने शुक्रवार को छापेमारी की। बेगूसराय एवं पटना स्थित आवास पर की गई छापेमारी में 12 बैंक खाते, जमीन के छह दस्तावेज एवं विभिन्न बीमा कंपनियों में निवेश के कागजात मिले। इन्हें जब्त कर लिया गया है। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, प्राप्त कागजात का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही, तलाशी एवं अनुसंधान का कार्य जारी है।
बिहार राज्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार को पुलिस इंस्पेक्टर माधव ठाकुर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद ब्यूरो की टीमों ने उनके सरकारी आवास, निजी निवास और कार्यालय सहित कई संभावित ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। यह छापेमारी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है, जिसके शुरुआती जांच में पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया।
निगरानी ब्यूरो ने बताया कि 2009 बैच के दारोगा रहे और वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात माधव ठाकुर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में 26 नवंबर 2025 को निगरानी थाने में कांड संख्या – 100/25 दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ 25,22,145 रुपये आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह उनकी कुल ज्ञात आय से करीब 47 प्रतिशत अधिक है।
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वहीं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने शुक्रवार को सिवान के हसनपुरा अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त की गिरफ्तारी गोपालपुर चौक बाजार, हुसैनपुर थाना स्थित मंगल साह के किराये के मकान में चल रहे अवैध कार्यालय से हुई। उसी थाना क्षेत्र के निवासी राजेंद्र कुमार के पुत्र श्रेय राज ने निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज करायी थी कि राजस्व कर्मचारी जमीन का परिमार्जन एवं दाखिल-खारिज करने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा है।
निगरानी ब्यूरो ने शिकायत मिलने के बाद कांड दर्ज कर अनुसंधानकर्ता डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक धावादल का गठन किया। गिरफ्तार अभियुक्त दिलीप सिन्हा को आवश्यक पूछताछ के बाद मुजफ्फरपुर स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
आय से अधिक संपत्ति का पूरा मामला
मामला पुलिस इंस्पेक्टर माधव ठाकुर से जुड़ा है, जिन पर अपने ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप है। निगरानी विभाग को लंबे समय से उनके खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गोपनीय तरीके से जांच शुरू की गई। जांच के दौरान, यह पाया गया कि उनकी आय और संपत्ति के बीच एक बड़ा अंतर है, जो प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति का स्पष्ट संकेत देता है। ब्यूरो ने इस संबंध में एक प्राथमिक रिपोर्ट तैयार की और उसके आधार पर न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की।
छापेमारी के दौरान, निगरानी टीम ने माधव ठाकुर के विभिन्न ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों से संबंधित कागजात, निवेश प्रमाण और अन्य संपत्ति से जुड़े विवरण खंगाले। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कैश लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड्स की भी गहन जांच की जा रही है। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सबूतों की विस्तृत जांच के बाद ही आय से अधिक संपत्ति के वास्तविक आंकड़े सामने आ पाएंगे।
भविष्य की कार्रवाई और विभाग का रुख
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का एक हिस्सा है। छापेमारी के बाद इंस्पेक्टर माधव ठाकुर के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जब्त किए गए सबूतों का विश्लेषण करने के बाद उनके खिलाफ विधिवत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की जांच और मुकदमा चलाया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सरकारी सेवा से बर्खास्तगी और संपत्ति की कुर्की जैसी कार्रवाई भी संभव है।
ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका विभाग जनसेवकों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर लगातार नजर रख रहा है और किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है। इस तरह की कार्रवाइयां यह संदेश देती हैं कि भ्रष्ट अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों।





