पटना न्यूज़:
बिहार की सियासत में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. विधानसभा के गलियारों में अब कागजों का शोर नहीं, बल्कि टैबलेट की खामोश रोशनी बिखरेगी. लेकिन इस तकनीकी बदलाव के बीच असली नज़रें तो 2 दिसंबर पर टिकी हैं, जब तय होगा कि सदन का नया अध्यक्ष कौन होगा.
बिहार विधानसभा का पहला सत्र 1 दिसंबर, यानी सोमवार से शुरू होने वाला है. इस बार का यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक होगा. सबसे बड़ा बदलाव सदन की कार्यवाही के संचालन के तरीके में देखने को मिलेगा. अब विधायकों के हाथों में कागजों के भारी-भरकम बंडल की जगह आधुनिक टैबलेट होंगे, जिससे सदन की पूरी कार्यवाही संचालित की जाएगी.
इस नई व्यवस्था के साथ, बिहार विधानसभा पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस होने जा रही है. यह कदम न केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे समय और संसाधनों की भी भारी बचत होगी. अब प्रश्नकाल से लेकर अन्य विधायी कार्यों तक, सब कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा.
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यूपी की राह पर बिहार विधानसभा
उत्तर प्रदेश के बाद बिहार देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसकी विधानसभा पूरी तरह से डिजिटल हो गई है. इस हाई-टेक बदलाव के लिए सभी विधायकों को टैबलेट मुहैया कराए गए हैं. माना जा रहा है कि इस पहल से विधानसभा के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और तेजी आएगी. कार्यवाही का रिकॉर्ड रखना भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
इस डिजिटल प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है, ताकि सत्र के दौरान किसी भी सदस्य को तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े.
सबकी निगाहें अध्यक्ष के चुनाव पर
तकनीकी बदलावों के अलावा यह सत्र राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. सत्र के दूसरे दिन, यानी 2 दिसंबर को विधानसभा के नए अध्यक्ष का चुनाव होगा. इस चुनाव पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं और इसे लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज है.
सत्र का संक्षिप्त कार्यक्रम:
- 1 दिसंबर: विधानसभा सत्र की शुरुआत और सदस्यों का शपथ ग्रहण.
- 2 दिसंबर: नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव.
कुल मिलाकर, यह सत्र बिहार की राजनीति और विधायी प्रक्रिया में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ तकनीक और परंपरा का संगम देखने को मिलेगा.



