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29 नवम्बर, 2025

बिहार विधानसभा में ‘पेपरलेस’ क्रांति, विधायकों के हाथ में अब कागज नहीं, टैबलेट होगा

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पटना न्यूज़

बिहार विधानसभा में इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ। माननीय विधायकों के हाथ में अब भारी-भरकम फाइलों और कागजों के पुलिंदे नहीं, बल्कि चमचमाते टैबलेट होंगे। लेकिन क्या कहानी सिर्फ इतनी ही है या इस डिजिटल छलांग के साथ ही सदन में कुछ और भी नया होने वाला है?

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यूपी के बाद बिहार में ‘ई-विधान’ लागू

बिहार विधानमंडल के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 1 दिसंबर से शुरू हो रहे सत्र के साथ ही विधानसभा की पूरी कार्यवाही डिजिटल हो जाएगी। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार देश का दूसरा राज्य होगा जहां ‘नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन’ (NeVA) को पूरी तरह से लागू किया जा रहा है।

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इस नई व्यवस्था के तहत सदन के अंदर विधायकों को अब सवाल पूछने से लेकर अन्य विधायी कार्यों के लिए कागज का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। सारी जानकारी और दस्तावेज उनके टैबलेट पर उपलब्ध होंगे। इस बड़े बदलाव के लिए विधानसभा सचिवालय ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी सदस्यों की सीटों पर टैबलेट लगा दिए गए हैं और उन्हें इसके इस्तेमाल के लिए जरूरी ट्रेनिंग भी दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और पर्यावरण की रक्षा करना है।

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1 दिसंबर से सत्र की शुरुआत, 2 को होगा अध्यक्ष का चुनाव

विधानसभा का यह सत्र कई मायनों में अहम होने वाला है। सोमवार, 1 दिसंबर को सत्र की शुरुआत होगी। इसके अगले ही दिन, यानी 2 दिसंबर को विधानसभा के नए अध्यक्ष (स्पीकर) का चुनाव किया जाएगा। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी की निगाहें इस पर टिकी होंगी कि सदन का नया अध्यक्ष कौन बनता है।

इस सत्र के दौरान न केवल अध्यक्ष का चुनाव होगा, बल्कि कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी निपटाए जाएंगे। सरकार कई नए विधेयक पेश कर सकती है और विपक्ष भी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। डिजिटल कार्यवाही से उम्मीद की जा रही है कि इससे सदन का कीमती समय बचेगा और कामकाज में अधिक कुशलता आएगी।

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