Patna News:
पटना का सरकारी अस्पताल अब सिर्फ मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां वो होने जा रहा है जो बिहार ने पहले कभी नहीं देखा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक दौरे ने इस बदलाव की पटकथा लिख दी है, जिसके बाद अब जिंदगियां जमीन से ही नहीं, बल्कि आसमान से भी बचाई जा सकेंगी।
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH), के कायाकल्प का काम तेजी से चल रहा है। इसे अब सिर्फ एक इलाज केंद्र के तौर पर नहीं, बल्कि एक हाई-टेक मेडिकल सुविधाओं वाले नए लैंडमार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद निर्माण कार्यों का जायजा लेने के लिए औचक निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने खुद संभाला मोर्चा
सीएम नीतीश कुमार ने पीएमसीएच परिसर में बन रही नई इमरजेंसी यूनिट का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ पूरे प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और काम की रफ्तार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन के डिजाइन, मरीजों के आने-जाने के रास्ते और अन्य तकनीकी पहलुओं को समझा। उनका मुख्य फोकस इस बात पर था कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के उच्चतम मानकों के साथ समय पर पूरा हो।
छत पर उतरेगा एयर एंबुलेंस, हवा में बनेगा ‘ग्रीन कॉरिडोर’
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता पीएमसीएच की इमरजेंसी यूनिट की छत पर एयर एंबुलेंस की लैंडिंग की सुविधा है। मुख्यमंत्री ने इस हेलीपैड के निर्माण कार्य को विशेष प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इस सुविधा के शुरू हो जाने के बाद बिहार के दूर-दराज के इलाकों से गंभीर मरीजों को सीधे एयरलिफ्ट करके अस्पताल की छत पर उतारा जा सकेगा।
इससे मरीजों का कीमती समय बचेगा, जिसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। सड़क मार्ग से लगने वाले कई घंटों के सफर और ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म हो जाएगी, जिससे गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त मरीजों की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
सुरक्षा और गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को काम में तेजी लाने के साथ-साथ कुछ अहम निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। उनके मुख्य निर्देश थे:
- निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
- मरीजों और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं।
- निर्माण की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
इस आधुनिक सुविधा के बनने के बाद पीएमसीएच न केवल बिहार, बल्कि आसपास के राज्यों के लिए भी एक रेफरल सेंटर के रूप में उभरेगा। यह प्रोजेक्ट बिहार की स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में एक मील का पत्थर साबित होने की क्षमता रखता है।



