पटना। बिहार में क्या अब बिजली की समस्या बीते दिनों की बात हो जाएगी? प्रदेश में लग रहे उद्योगों को क्या अब कभी पावर कट का सामना नहीं करना पड़ेगा? सरकार ने एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है, जो बिहार की औद्योगिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है.
बिहार सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक बड़ी पहल की है. प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 167 नए पावर सब-स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा. इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश कर रही कंपनियों और भविष्य में आने वाले उद्योगों को 24 घंटे качественная बिजली उपलब्ध कराना है, ताकि उत्पादन पर कोई असर न पड़े.
क्यों पड़ी इन पावर सब-स्टेशनों की ज़रूरत?
यह फैसला राज्य में बढ़ते निवेश को देखते हुए लिया गया है. जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में 423 कंपनियों ने बिहार में लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. इतने बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय बिजली बुनियादी ढांचे का होना अत्यंत आवश्यक है. सरकार की यह योजना इन्हीं औद्योगिक प्रस्तावों को धरातल पर उतारने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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उद्योगों और राज्य को होंगे ये बड़े फायदे
इन पावर सब-स्टेशनों के निर्माण से बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है. बिजली की समस्या के बिना उद्योग अपनी पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे, जिससे न केवल उनका मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
- उद्योगों को 24 घंटे मिलेगी निर्बाध और स्थिर बिजली.
- बिजली कटौती से होने वाले उत्पादन के नुकसान से मुक्ति मिलेगी.
- राज्य में नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक बेहतर माहौल बनेगा.
- औद्योगिक उत्पादन बढ़ने से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी.
- बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना बढ़ेगी.
कुल मिलाकर, यह परियोजना बिहार को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है.







