सुपौल: सुपौल से वो तस्वीरें सामने आई हैं, जो उत्तर बिहार के लिए किसी सपने के सच होने जैसी हैं. दशकों का इंतजार खत्म हो गया है और उस महात्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है, जो ‘बिहार के शोक’ कही जाने वाली कोसी नदी के पानी को मेची नदी तक पहुंचाएगी. मशीनों की गूंज के साथ ही इस इलाके के लोगों की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं.
क्या है कोसी-मेची लिंक परियोजना?
उत्तर बिहार की दो प्रमुख नदियों, कोसी और मेची, को आपस में जोड़ने की यह योजना दशकों से कागजों पर थी, लेकिन अब इसने हकीकत का रूप लेना शुरू कर दिया है. सुपौल जिले में इस परियोजना पर जमीनी काम शुरू हो चुका है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी में पहुंचाना है, जिससे एक साथ दो बड़े लक्ष्यों को साधा जा सके – बाढ़ पर नियंत्रण और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता.
यह परियोजना राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पूरा कर रही हैं. इसके तहत एक लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा जो दोनों नदियों को जोड़ेगी. सुपौल में मशीनों की तैनाती और शुरुआती काम के साथ ही इस बहुप्रतीक्षित योजना ने पहला कदम बढ़ा दिया है.
बाढ़ की तबाही पर लगेगी लगाम
उत्तर बिहार हर साल कोसी नदी में आने वाली बाढ़ की विभीषिका झेलता है. मानसून के दौरान कोसी का रौद्र रूप लाखों लोगों के लिए तबाही का कारण बनता है, हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है और जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. कोसी-मेची लिंक परियोजना इस तबाही को कम करने में एक ‘वरदान’ साबित हो सकती है. योजना के तहत, बाढ़ के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से मेची नदी की ओर मोड़ दिया जाएगा, जिससे कोसी के जलस्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और बाढ़ का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा.
2.14 लाख हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी
यह परियोजना सिर्फ बाढ़ से ही राहत नहीं देगी, बल्कि यह इस क्षेत्र की कृषि-अर्थव्यवस्था के लिए भी एक गेम-चेंजर साबित होगी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से लगभग 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधे तौर पर सिंचाई का लाभ मिलेगा. इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो सिंचाई के लिए पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं.
परियोजना के मुख्य लाभ:
- उत्तर बिहार के एक बड़े हिस्से को बाढ़ की समस्या से राहत मिलेगी.
- किसानों को साल भर खेती के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा.
- भूजल स्तर में सुधार होने की भी संभावना है.
- कृषि उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
इस परियोजना की शुरुआत ने स्थानीय लोगों और किसानों में एक नई उम्मीद जगाई है. हालांकि इसे पूरा होने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन दशकों पुरानी एक बड़ी समस्या के समाधान की दिशा में यह एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.





