पटना: बिहार से 30 IAS अधिकारी अपने राज्य से बाहर तैनात हैं. इनमें से दो तो अगले साल सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन बाकी अधिकारियों का क्या? कई वापस लौटना चाहते हैं, पर ऐसा हो क्यों नहीं पा रहा? यह एक ऐसा सवाल है जो ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
बिहार प्रशासनिक सेवा के ऐसे कई अधिकारी हैं जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रोन्नत होने के बाद अब अपने मूल कैडर बिहार में सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 30 ऐसे IAS अधिकारी हैं जो बिहार कैडर से संबंधित होने के बावजूद राज्य के बाहर प्रतिनियुक्ति पर हैं या अन्य राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यह स्थिति राज्य के प्रशासनिक ढांचे में अधिकारियों की कमी और उनके अनुभव के संभावित उपयोग पर सवाल उठाती है.
आखिर क्यों बाहर हैं बिहार के ये अधिकारी?
इनमें से कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति या अंतर-राज्यीय प्रतिनियुक्ति के माध्यम से बिहार छोड़ा था. इनमें से कुछ को उनके बेहतर प्रदर्शन या विशेष दक्षता के कारण केंद्र सरकार या अन्य राज्य सरकारों द्वारा अनुरोध कर बुलाया गया था. हालांकि, एक बार बाहर जाने के बाद, बिहार वापस लौटना उनके लिए एक जटिल प्रक्रिया बन जाती है, जिसमें कई प्रशासनिक औपचारिकताएं और अनुमोदन शामिल होते हैं.
खास बात यह है कि इन 30 अधिकारियों में से दो ऐसे हैं जिनकी सेवानिवृत्ति अगले साल यानी 2025 में होनी है. उनकी सेवानिवृत्ति से पहले, उनके वापस बिहार कैडर में लौटने की संभावना बहुत कम दिख रही है. यह दर्शाता है कि बिहार अपने कुछ अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं उनके करियर के अंतिम पड़ाव पर भी नहीं ले पा रहा है.
वापसी की चाहत, पर राह मुश्किल
जानकारी के मुताबिक, इन बाहर पदस्थ अधिकारियों में से कई ऐसे हैं जो अपनी सेवाएं वापस बिहार को देना चाहते हैं. उन्होंने विभिन्न माध्यमों से राज्य सरकार और कार्मिक विभाग तक अपनी यह इच्छा भी पहुंचाई है. हालांकि, अधिकारियों की वापसी की प्रक्रिया में कई बाधाएं आती हैं, जिनमें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के नियम, अंतर-राज्यीय स्थानांतरण की जटिलताएं और बिहार सरकार की मौजूदा आवश्यकताएं शामिल हैं.
राज्य के नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक विशेषज्ञों के लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती है कि वे कैसे इन अनुभवी अधिकारियों को वापस बिहार ला सकें, ताकि उनके ज्ञान और अनुभव का उपयोग राज्य के विकास और प्रशासन को सुदृढ़ करने में किया जा सके. फिलहाल, ये अधिकारी अपनी जन्मभूमि से दूर दूसरे राज्यों या केंद्रीय विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि बिहार को उनकी कमी खल रही है.



