दरभंगा न्यूज़: दरभंगा के न्यायालय में कानून का चाबुक चला है, जिसने एक साथ कई अपराधियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा की अदालत ने चार गंभीर मामलों में फंसे 13 आरोपियों को ज़मानत देने से साफ इनकार कर दिया है। यह फैसला जिले में अपराध के खिलाफ न्यायपालिका के कड़े रुख को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि गंभीर मामलों में आरोपी को आसानी से राहत नहीं मिलेगी।
न्यायाधीश मिश्रा की अदालत का अहम निर्णय
जिला न्यायमंडल दरभंगा के सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा की अदालत ने हाल ही में चार अलग-अलग संगीन मामलों में 13 आरोपियों की नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि कोर्ट का यह कदम गंभीर अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों के प्रति सख्ती का संदेश देता है और यह दिखाता है कि न्यायपालिका किसी भी तरह के आपराधिक मामले में समझौता करने को तैयार नहीं है।
अश्लील वीडियो वायरल करने का मामला
अदालत के सामने आए मामलों में से एक, साइबर अपराध से जुड़ा था। कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के बलहा गांव के निवासी अब्दुल मजीद की नियमित जमानत याचिका खारिज की गई। उस पर साइबर थानाकांड संख्या 61/25 के तहत अश्लील वीडियो वायरल करने का गंभीर आरोप है। यह मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और साइबर अपराधों की बढ़ती चिंता को उजागर करता है, जिस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
जानलेवा हमले के तीन अलग-अलग प्रकरण
इसके अतिरिक्त, जानलेवा हमला के आरोप में दर्ज बहेड़ी थानाकांड संख्या 318/24 में तुर्की गांव के तीन निवासियों – राजकुमार सदा, पप्पू सदा और प्रदीप सदा – की जमानत अर्जी भी कोर्ट ने नामंजूर कर दी। ये तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और अदालत ने इनकी रिहाई को उचित नहीं समझा।
अदालत ने जानलेवा हमले से जुड़े दो अन्य मामलों में भी सख्त रुख अपनाया। भालपट्टी थानाकांड संख्या 56/25 के आरोपी मोहन चौपाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे उसे न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।
वाजितपुर मामले में आठ आरोपियों की अग्रिम जमानत रद्द
इसी तरह, वाजितपुर थानाकांड संख्या 55/25 से जुड़े आठ आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका भी सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अस्वीकृत कर दी। इन आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
- मो. दुलारे साह
- मो. सितारे साह
- मो. प्यारे साह
- मो. नौशाद साह
- मो. मोस्किम
- मो. मुख्तार
- मो. अंजार साह
- मो. खुदूश
इन फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका गंभीर अपराधों में संलिप्त आरोपियों को आसानी से राहत देने के मूड में नहीं है और कानून का राज स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।








