मुज़फ़्फ़रपुर न्यूज़: बिहार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना… हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का वादा… लेकिन मुज़फ़्फ़रपुर के गायघाट में यह योजना अब सवालों के घेरे में है। करोड़ों खर्च के बाद भी जब गांव वाले बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, तब जाकर पंचायती राज पदाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। क्या है इस ‘महाघोटाले’ की पूरी कहानी?
पानी के लिए तरसते ग्रामीण
योजना की विफलता का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। गर्मी के मौसम में भूजल स्तर लगातार नीचे जाने के कारण हैंडपंप भी अक्सर साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में स्वच्छ पानी की उपलब्धता ग्रामीणों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पानी की इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए हैं। कई गांवों में तो नल-जल योजना को अभी तक स्वीकृति ही नहीं मिली है, जिससे वहां के निवासियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अधिकारी बेखबर, जनता परेशान
बंद पड़ी नल-जल योजनाओं और पानी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों ने अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बनाई है। यहां तक कि गांव में बिछी नल-जल लाइनों की स्थिति और उनके संचालन के बारे में भी विभाग के पास पूरी जानकारी का अभाव है। ग्रामीण कई बार मौखिक और लिखित आवेदन देकर अधिकारियों से योजना को चालू करवाने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन उनकी गुहार पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नतीजतन, क्षेत्र में जल वितरण का पूरा सिस्टम राम भरोसे चल रहा है, और ग्रामीण स्वच्छ पानी के इंतजार में हैं।







