दरभंगा कोर्ट रिपोर्टर: बिहार के दरभंगा में न्याय की ऐसी मिसाल पेश हुई है, जो रूह कंपा देने वाले अपराधों को अंजाम देने वालों के लिए एक सबक है। एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के संगीन मामले में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने हैवानियत की हर हद पार करने वाले दोषी को सलाखों के पीछे 20 साल बिताने पर मजबूर कर दिया है। आखिर क्या था यह पूरा मामला और कैसे मिला पीड़िता को इंसाफ, आइए जानते हैं…
अदालत का कड़ा फैसला
दरभंगा के व्यवहार न्यायालय स्थित पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने रैयाम थानाक्षेत्र के पचाढ़ी निवासी मंटून चौपाल पुत्र कुशो चौपाल को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह सजा रैयाम थानाकांड संख्या 34/18 से बने जीआर नंबर 43/18 के तहत सुनाई गई है। पॉक्सो के स्पेशल पीपी विजय कुमार ने इस मामले में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया।
हैवानियत की शुरुआत और धमकी
यह मामला साल 2018 के फागुन महीने का है, जब पीड़िता घास काटने गई थी। उसी दौरान अभियुक्त मंटून चौपाल ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इस घटना के ठीक एक महीने बाद, जब पीड़िता दोबारा घास लाने गई, तो अभियुक्त ने उसे फिर अपनी हवस का शिकार बनाया। हैवानियत की इंतहा यह थी कि उसने पीड़िता को धमकी भी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस खौफनाक धमकी के कारण पीड़िता ने लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी।
ऐसे सामने आया पूरा मामला
घटना के लगभग छह महीने बाद, पीड़िता के माता-पिता को पता चला कि वह गर्भवती है। अपनी बेटी की इस हालत को देखकर जब उन्होंने उससे सख्ती से पूछा, तो उसने हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुई सारी आपबीती परिवार को बताई। इसके बाद, परिवार ने न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया और 26 सितंबर 2018 को थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की। जांच के उपरांत 16 दिसंबर 2018 को अभियुक्त मंटून चौपाल के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय ने 12 फरवरी 2019 को अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)/34 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत संज्ञान लिया। इसके बाद, 8 मई 2019 को दुष्कर्मी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(D), 376(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आरोप तय किए गए।
दोषी को मिली अलग-अलग धाराओं में सजा
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल पांच गवाहों की गवाही कराई गई, जिन्होंने इस जघन्य अपराध को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शनिवार को अदालत ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर दोषी मंटून चौपाल को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।
- पॉक्सो एक्ट की धारा 6: 20 वर्षों का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का अर्थदंड।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2): 10 वर्षों का कारावास और 10 हजार रुपये का अर्थदंड।
- पॉक्सो एक्ट की धारा 8: 7 वर्षों की सजा और 10 हजार रुपये का अर्थदंड।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, यानी उसे कुल 20 वर्षों का कारावास भुगतना होगा। इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और गहरा हुआ है।







