पटना न्यूज़:
दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की क्रांति देख रही है, तब पटना की लड़कियां इसमें पीछे कैसे रह सकती हैं? गंगा देवी महिला कॉलेज में कुछ ऐसा हुआ, जिसने छात्राओं को भविष्य की तकनीक से सीधे जोड़ दिया. जानिए कैसे एक विशेष कोर्स ने इन छात्राओं के लिए टेक्नोलॉजी की दुनिया में नए रास्ते खोल दिए हैं.
पटना के प्रतिष्ठित गंगा देवी महिला कॉलेज ने अपनी छात्राओं को भविष्य की प्रौद्योगिकी से लैस करने के लिए एक अनूठी पहल की है। कॉलेज प्रशासन ने हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर एक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स का आयोजन किया। इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयार करना और उन्हें एआई जैसे उन्नत क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं की सुविधा और सीखने की प्रभावशीलता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। कॉलेज ने इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए एक मिश्रित शिक्षण मॉडल, यानी हाइब्रिड मोड, का सहारा लिया, जिसने छात्राओं को काफी आकर्षित किया।
हाइब्रिड मॉडल: क्लासरूम और स्क्रीन का संगम
इस कोर्स की सबसे खास बात इसका हाइब्रिड प्रारूप था। इसे दो चरणों में बांटा गया था ताकि छात्राओं को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों का संतुलित ज्ञान मिल सके।
- ऑफलाइन कक्षाएं: कोर्स का पहला चरण 17 नवंबर से 22 नवंबर तक चला। इस दौरान छात्राओं ने कॉलेज परिसर में आयोजित कक्षाओं में भाग लिया। इससे उन्हें प्रशिक्षकों के साथ सीधे संवाद करने और व्यावहारिक पहलुओं को गहराई से समझने का मौका मिला।
- ऑनलाइन कक्षाएं: दूसरा चरण 24 नवंबर से 29 नवंबर तक ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया। इससे छात्राओं को अपने घर बैठे ही पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिली, जिससे वे बिना किसी बाधा के कोर्स पूरा कर सकीं।
इस हाइब्रिड मॉडल ने यह सुनिश्चित किया कि छात्राएं अपनी सुविधानुसार सीखने की प्रक्रिया में शामिल हो सकें, साथ ही उन्हें क्लासरूम में सीखने का व्यावहारिक अनुभव भी मिले।
क्यों महत्वपूर्ण है छात्राओं के लिए AI की जानकारी?
आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है, चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, वित्त हो, या मनोरंजन। ऐसे में, एआई का ज्ञान छात्राओं को एक प्रतिस्पर्धी बढ़त देता है और उनके लिए रोजगार के नए अवसर खोलता है। गंगा देवी महिला कॉलेज द्वारा उठाया गया यह कदम छात्राओं को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और लैंगिक असमानता को कम करने में भी सहायक है।
इस तरह के पाठ्यक्रम छात्राओं में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि वे भी जटिल तकनीकी क्षेत्रों में महारत हासिल कर सकती हैं। यह पहल न केवल छात्राओं के व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार के तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है।





