जाले में एक स्कूल में हुई अभिभावक-शिक्षक बैठक में हंगामा हो गया। यहां अभिभावकों को जो सच्चाई पता चली, उसे सुनकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आखिर ऐसा क्या था, जिसने अभिभावकों को शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने को मजबूर कर दिया?
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के निर्देश पर जाले प्रखंड के मध्य विद्यालय राढ़ी कन्या में शनिवार को शिक्षक अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया था। प्रभारी प्रधानाध्यापक विक्रमादित्य झा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यालय के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। प्रधानाध्यापक ने बैठक की शुरुआत में अभिभावकों को उनके सहयोग के महत्व के बारे में बताया।
मगर, बैठक में उपस्थित अभिभावकों को जल्द ही एक चौंकाने वाली सच्चाई का सामना करना पड़ा। उन्हें यह जानकर गहरा धक्का लगा कि पूरा विद्यालय मात्र दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहा है। इस खुलासे के बाद अभिभावकों का धैर्य जवाब दे गया और वे शिक्षा व्यवस्था पर अपनी नाराजगी व्यक्त करने लगे।
शिक्षकों की कमी पर फूटा गुस्सा
अभिभावकों ने आक्रोशित होते हुए सवाल उठाया, “सिर्फ दो शिक्षकों के सहारे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल सकती है?” उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इस पर प्रभारी प्रधानाध्यापक विक्रमादित्य झा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि विद्यालय में कुल चार शिक्षक कार्यरत हैं। हालांकि, दुर्भाग्यवश, उनमें से दो शिक्षक वर्तमान में छुट्टी पर हैं, जिसके कारण फिलहाल विद्यालय का संचालन केवल दो शिक्षकों के माध्यम से किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने लिया बड़ा फैसला
शिक्षकों की इस भारी कमी को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में गहरा रोष व्याप्त था। उन्होंने एक स्वर में विद्यालय में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में प्रतिनियुक्ति करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। यह निर्णय लिया गया कि इस मांग को उचित स्तर तक पहुंचाया जाएगा ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। बैठक के अंत में शिक्षक अजय कुमार यादव ने उपस्थित सभी अभिभावकों और ग्रामीणों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके साथ ही यह महत्वपूर्ण बैठक समाप्त हुई, लेकिन शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक गंभीर चुनौती बनकर सामने खड़ा रहा।



