
मुख्य बिंदु:
- विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत से पहले अजगैवीनाथ मंदिर में पेयजल की भारी किल्लत।
- लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा लगाया गया बोरिंग कई महीनों से खराब पड़ा है।
- लाखों की संख्या में आने वाले कांवड़ियों और स्थानीय भक्तों को होगी परेशानी।
- प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब तक नहीं हुई बोरिंग की मरम्मत।
भागलपुर: सावन का महीना सिर पर है और सुल्तानगंज से देवघर तक कांवड़ियों का सैलाब उमड़ने को तैयार है. लेकिन इस यात्रा के मुख्य पड़ाव, ऐतिहासिक अजगैवीनाथ मंदिर की एक तस्वीर बेहद चिंताजनक है. यहां आस्था का सागर तो है, पर पीने का पानी नहीं है! सरकारी विभाग की एक बोरिंग महीनों से बंद पड़ी है और पूरा मंदिर परिसर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है.
महीनों से खराब पड़ा है बोरिंग, अनसुनी हैं फरियादें
अजगैवीनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा एक बोरिंग स्थापित की गई थी. इसका उद्देश्य मंदिर में आने वाले भक्तों, पुजारियों और कर्मचारियों के लिए 24 घंटे पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना था. लेकिन यह बोरिंग पिछले कई महीनों से खराब पड़ी है. इसके कारण मंदिर में पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों द्वारा कई बार इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन संबंधित विभाग ने अब तक इसकी सुध नहीं ली है.
स्थिति यह है कि मंदिर में होने वाले नित्य पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी पानी का इंतजाम बाहर से करना पड़ रहा है. जो कुछ स्थानीय भक्त और पुजारी मंदिर आते हैं, उन्हें या तो अपने साथ पानी लाना पड़ता है या फिर आसपास के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है.
श्रावणी मेले की तैयारियों पर गंभीर सवाल
यह समस्या इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि कुछ ही हफ्तों में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले का आगाज होने वाला है. इस दौरान देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िए गंगा जल उठाने के लिए सुल्तानगंज पहुंचते हैं और अजगैवीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसे में जब सामान्य दिनों में ही पानी की किल्लत है, तो मेले के दौरान लाखों की भीड़ के लिए पेयजल की व्यवस्था कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल है. यह स्थिति श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है.
प्रशासनिक लापरवाही से भक्तों में भारी रोष
मेले से ठीक पहले इस तरह की बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है. महीनों से बंद पड़े बोरिंग को ठीक न किया जाना यह दर्शाता है कि अधिकारी इतने बड़े आयोजन को लेकर कितने गंभीर हैं. इस उदासीनता के कारण स्थानीय भक्तों और मंदिर से जुड़े लोगों में भारी रोष है. उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस बोरिंग को ठीक नहीं किया गया तो श्रावणी मेले के दौरान स्थिति अनियंत्रित हो सकती है और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से कब जागता है और इस गंभीर समस्या का समाधान करता है.




