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मार्च, 3, 2026
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भागलपुर की सड़कों पर गूंजे नारे, एड्स पर जागरूकता के लिए जुटे सैकड़ों लोग

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भागलपुर समाचार

लाल रिबन लगाए, हाथों में तख्तियां थामे ये लोग कौन थे और क्यों कह रहे थे ‘जानकारी ही बचाव है’? भागलपुर की सड़कों पर ये नज़ारा तब दिखा, जब दुनिया एक गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए एकजुट हो रही थी।

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विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) के मौके पर बिहार के भागलपुर में स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर एक जागरूकता रैली निकाली। इस रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को एचआईवी (HIV) संक्रमण के कारणों, लक्षणों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना था। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए यह रैली गुजरी, जिसमें बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों, छात्रों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।

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सड़कों पर गूंजा ‘जागरूकता ही बचाव’ का नारा

रैली में शामिल लोग हाथों में बैनर और पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर एड्स से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने और सही जानकारी देने वाले संदेश लिखे थे। ‘जानकारी ही बचाव है’, ‘एड्स से नहीं, भेदभाव से लड़ें’ जैसे नारों के साथ रैली शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से गुजरी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुंच सके।

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इस दौरान आयोजकों ने बताया कि एड्स को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं। इस वजह से लोग खुलकर इस पर बात करने से हिचकिचाते हैं या संक्रमित व्यक्ति से भेदभाव करते हैं। इस रैली का मकसद इसी चुप्पी को तोड़ना और लोगों को यह समझाना है कि सही जानकारी और सतर्कता से इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है एड्स पर जागरूकता?

विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। इस तरह के अभियानों के माध्यम से लोगों को कुछ महत्वपूर्ण बातों के प्रति सचेत किया जाता है, ताकि वे अपना और अपने परिवार का बचाव कर सकें। रैली के माध्यम से लोगों को मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया:

  • असुरक्षित यौन संबंध से बचें और हमेशा सुरक्षा अपनाएं।
  • खून चढ़वाने से पहले उसकी एचआईवी जांच सुनिश्चित करें।
  • संक्रमित या इस्तेमाल की हुई सुई और सिरिंज का प्रयोग कभी न करें।
  • गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच अवश्य कराएं, ताकि बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके।
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रैली के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ उठने-बैठने, खाना खाने या हाथ मिलाने से यह संक्रमण नहीं फैलता है। इसलिए, संक्रमित लोगों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार देना चाहिए।

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