
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने हाल ही में अडानी समूह की सीमेंट कंपनी एसीसी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, LIC ने एसीसी में अपनी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ऊपर कर ली है। अडानी समूह की कंपनियों में LIC के निवेश को लेकर विपक्ष लगातार सत्तारूढ़ बीजेपी पर सवाल उठाता रहा है।
विपक्ष के सवालों के बीच, सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय LIC को निवेश संबंधी फैसले लेने के लिए कोई सलाह या निर्देश जारी नहीं करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसीसी में यह निवेश स्थापित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुसार लिया गया एक स्वतंत्र निर्णय था।
वित्त मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी
वित्त मंत्री सीतारमण ने लोकसभा में एक जानकारी के दौरान बताया कि LIC ने अडानी समूह की आधा दर्जन से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में कुल 38,658.85 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में LIC द्वारा किए गए ये निवेश कंपनी के बुनियादी सिद्धांतों और विस्तृत शोध पर आधारित रहे हैं।
एसीसी कंपनी में हालिया निवेश के बारे में उन्होंने विशेष रूप से बताया कि इस संबंध में वित्त मंत्रालय की ओर से किसी भी प्रकार का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। यह निवेश पूरी तरह से LIC की अपनी स्थापित SOP के अनुसार ही किया गया है, जो निवेश के लिए एक मानक प्रक्रिया है।
किन-किन अडानी कंपनियों में है LIC का निवेश?
वित्त मंत्री सीतारमण ने यह भी खुलासा किया कि LIC ने अपने बोर्ड की मंजूरी और तय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मई 2025 में अडानी पोर्ट्स स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) की सुरक्षित नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
उन्होंने आगे बताया कि LIC की निवेश नीति के अनुसार, यह आम तौर पर एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध शीर्ष 500 कंपनियों में निवेश करती है। LIC के पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं बड़ी और स्थापित कंपनियों में लगा हुआ है, जो कंपनी की दीर्घकालिक निवेश रणनीति का हिस्सा है।







