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फ़रवरी, 19, 2026
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मुजफ्फरपुर में खेती का नया अध्याय: किसानों को मिला प्रकृति से जुड़ने का मंत्र

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मुजफ्फरपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो खेती-किसानी की सदियों पुरानी तस्वीर बदलने का माद्दा रखती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बोझ तले दबी धरती अब राहत की सांस ले सकती है, क्योंकि किसानों को प्रकृति की ओर लौटने का एक नया रास्ता दिखाया जा रहा है। जानिए कैसे यह प्रशिक्षण किसानों के जीवन में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और भविष्य की खेती के लिए नई उम्मीद जगा रहा है।

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और व्यावहारिक तरीकों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अन्नदाताओं को टिकाऊ और पर्यावरण-हितैषी कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करना है, ताकि वे रासायनिक निर्भरता से मुक्त होकर अपनी आय बढ़ा सकें और मिट्टी के स्वास्थ्य को भी सुधार सकें।

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वर्तमान समय में, रसायनों के अत्यधिक उपयोग से न केवल कृषि योग्य भूमि की उर्वरता लगातार घट रही है, बल्कि यह भूजल और जैव विविधता के लिए भी खतरा बन रहा है। ऐसी स्थिति में, प्राकृतिक खेती एक समाधान के रूप में उभर रही है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण फसल देने की क्षमता रखती है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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प्राकृतिक खेती का महत्व और लाभ

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को उन तकनीकों से अवगत कराया गया, जो बिना किसी कृत्रिम इनपुट के खेती को सफल बनाती हैं। इसमें मिट्टी की प्राकृतिक संरचना को बनाए रखना, जैविक खाद का उपयोग और कीट नियंत्रण के प्राकृतिक उपाय शामिल हैं। इन पद्धतियों को अपनाकर किसान न केवल अपनी फसलों की गुणवत्ता सुधार सकते हैं, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी ला सकते हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है। यह किसानों को सशक्त करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और पोषण से भरपूर भोजन उपलब्ध कराती है। मुजफ्फरपुर में दिया गया यह प्रशिक्षण स्थानीय कृषि परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

किसानों के लिए नई राह और भविष्य की उम्मीदें

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर किसानों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें आधुनिक, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह आशा की जा रही है कि इस प्रशिक्षण से प्रेरित होकर मुजफ्फरपुर के अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे, जिससे पूरे बिहार में कृषि विकास का एक नया और हरित मॉडल स्थापित हो सकेगा। यह केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि खेती के भविष्य के लिए एक सशक्त संदेश है।

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