
मुंबई: बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी बिकने वाली है. ऑफर फॉर सेल (OFS) खुलते ही शेयर बाजार में हड़कंप मच गया. रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगने से पहले ही शेयर 2% तक लुढ़क गए. आखिर क्या है सरकार की मंशा और क्यों गिर रहे हैं बैंक के शेयर?
सरकार बेच रही 6% हिस्सेदारी, क्या है OFS?
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में अपनी 6 प्रतिशत हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बेचने का निर्णय लिया है. निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह ऑफर नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है, जबकि रिटेल निवेशक 3 दिसंबर को इसमें बोली लगा सकेंगे. सरकार कुल 5% इक्विटी बेचेगी और साथ ही ग्रीन शू ऑप्शन के तहत अतिरिक्त 1% हिस्सेदारी भी बेचने की पेशकश कर सकती है. DIPAM के अनुसार, OFS अपने बेस साइज के मुकाबले 400% तक सब्सक्राइब हुआ है.
इस ऑफर के लिए सरकार ने प्रति शेयर 54 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया है. वर्तमान बाजार मूल्य पर, बेस ऑफर का मूल्य लगभग 2,200 करोड़ रुपये है. वहीं, ग्रीन शू ऑप्शन के माध्यम से सरकार को अतिरिक्त 400 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही के शेयरधारिता डेटा के अनुसार, केंद्र सरकार की बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 79.6% हिस्सेदारी है. OFS के बाद, सरकार अपनी हिस्सेदारी को 75% से नीचे लाने का लक्ष्य रखती है. इससे बैंक की पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% से ऊपर चली जाएगी, जो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक है. पब्लिक शेयरहोल्डिंग का मतलब आम जनता के पास बैंक के शेयरों की वह हिस्सेदारी है, जिससे किसी एक संस्था का बैंक पर अत्यधिक नियंत्रण नहीं रहता.
क्यों गिरी PSU बैंकों की चाल?
इसी बीच, एक अन्य घटनाक्रम में, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में संसद में कहा था कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है. इस बयान के बाद, PSU बैंकों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई. इंडियन बैंक के शेयरों में सबसे अधिक 6% की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और UCO बैंक जैसे अन्य PSU बैंकों के शेयरों में भी 2% तक की गिरावट आई. इस बिकवाली के दबाव के चलते निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स भी 3% फिसलकर 8,264 के इंट्राडे निचले स्तर पर आ गया, जो हाल के 8,665 के उच्च स्तर से लगभग 5% नीचे है.
इस OFS प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल नियामक आवश्यकताओं को पूरा करना है, बल्कि सरकारी खजाने में भी कुछ अतिरिक्त धन जुटाना है. हालांकि, बाजार की वर्तमान प्रतिक्रिया दर्शाती है कि निवेशकों के बीच कुछ चिंताएं बनी हुई हैं.







