



अलीनगर,दरभंगा देशज टाइम्स: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राम कुमार ठाकुर की सेवानिवृत्ति के अवसर पर अलीनगर में एक भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने उनके सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी और इस यादगार पल को खास बनाने के लिए एकजुट दिखे। इस अवसर पर राम कुमार ठाकुर ने अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए शिक्षकों को शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह समारोह शिक्षा विभाग के प्रति उनके दशकों के समर्पण और सेवा को सम्मान देने का एक माध्यम बना।
उत्सव जैसा माहौल, यादगार विदाई
बुधवार को अलीनगर प्रखंड के बीआरसी कार्यालय में आयोजित इस विदाई समारोह में उत्सव जैसा माहौल था। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राम कुमार ठाकुर 30 नवंबर 2025 को अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे, और उनके सम्मान में शिक्षकों ने इस कार्यक्रम को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शिक्षक संघ से लेकर सभी शिक्षकों में उत्साह स्पष्ट दिख रहा था। इस अवसर पर शिक्षकों ने उन्हें अंग वस्त्र के साथ विभिन्न तरह के सामानों से सम्मानित कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
पांच प्रखंडों की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाली
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीईओ राम कुमार ठाकुर ने अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण बातों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 10 जुलाई 2019 को यहां योगदान दिया था। बीच में एक वर्ष के लिए वे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए थे, लेकिन 25 मई 2022 से वे एक बार फिर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। इस दौरान उन्हें सिर्फ अलीनगर ही नहीं, बल्कि ताड़डीह, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, कुशेश्वर स्थान पश्चिमी, घनश्यामपुर और बेनीपुर प्रखंडों की भी बारी-बारी से अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली, जिसका उन्होंने अपनी पूरी क्षमता के साथ निर्वहन करने का भरसक प्रयास किया।
शिक्षक और संसाधनों की कमी हुई दूर
राम कुमार ठाकुर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का पद संभाला था, तब विद्यालयों में शिक्षकों से लेकर संसाधनों तक की भारी कमी थी। लेकिन, समय के साथ इस स्थिति में सुधार आया है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि अब धीरे-धीरे सभी समस्याओं का समाधान हो गया है और शिक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सुदृढ़ हुई है।
शिक्षकों को दिया ईमानदारी का संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आपको सरकार द्वारा जो जिम्मेदारी दी गई है, उसका ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करें। जब आप विद्यालय जाएं, तो वहां बच्चों को कुछ न कुछ अवश्य पढ़ाने का काम करें। इससे आपके साथ-साथ आपके बच्चों का भी भला होगा। अन्यथा, जो शिक्षक विद्यालय जाने के बाद भी बच्चों को पठन-पाठन नहीं कराएंगे, उसका दुष्प्रभाव उनके बच्चों पर भी पड़ेगा।” उनका यह संदेश शिक्षकों को अपनी भूमिका के प्रति अधिक गंभीर होने की प्रेरणा देता है।
भावुक पलों के साक्षी बने गणमान्य लोग
विदाई समारोह में दर्जनों शिक्षक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कई वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए राम कुमार ठाकुर के सफल कार्यकाल की सराहना की और उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर सभी मुख्य अतिथियों को पाग, चादर और माला से सम्मानित किया गया। शिक्षिका मोनी कुमारी ने स्वागत गीत गाकर माहौल को और भी भावुक बना दिया। उनके गाए बोल – “सुना है आंगन सुना है मन गुरुवर न जाओ यही कहती है धड़कन” – सभी की भावनाओं को दर्शा रहे थे।
उपस्थित प्रमुख हस्तियां
कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में रिजवान आलम, देवाशीष, मंसूर आलम, विजय पंडित, शिव कुमार साहू, मनोज यादव, आसिफ आदिल और शंभू यादव सहित कई अन्य लोग शामिल थे। इस अवसर पर चंदन कुमार पाठक, विनेश पासवान, अशोक कुमार, मीरा झा, संजय कुमार झा, सोनू कुमार शाह और एम ए सारीम जैसे गणमान्य व्यक्तियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे। कार्यक्रम का मंच संचालन शिक्षक नेता रफीउद्दीन ने कुशलतापूर्वक किया। इस भावुक और यादगार समारोह के अंत में एक भव्य भोज का भी आयोजन किया गया था।


