
कभी गरीबों का सोना कही जाने वाली चांदी ने बाजार में ऐसे गोते लगाए हैं कि सोने के भाव भी पानी भरते नजर आ रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को चांदी ने ₹3,126 प्रति किलोग्राम की छलांग लगाते हुए ₹1,84,727 का नया रिकॉर्ड स्तर छुआ। सोने का वायदा कारोबार भी वैश्विक रुझानों के साथ ₹1,30,766 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।
चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
इस अप्रत्याशित उछाल का मुख्य कारण भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निम्न स्तर पर फिसल जाना है। रुपये में आई इस भारी गिरावट ने सोने और चांदी, दोनों की कीमतों को पंख लगा दिए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी पूरा बाजार एक्शन में नजर आया। गोल्ड फरवरी 2026 वायदा ₹1,007 की बढ़त के साथ ₹1,30,766 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि सिल्वर मार्च 2026 वायदा ने ₹3,126 की शानदार तेजी के साथ ₹1,84,727 प्रति किलोग्राम के पिछले ऑल-टाइम हाई को फिर से छू लिया।
रुपये की गिरावट ने बढ़ाई महंगाई
विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की कमजोरी सीधे तौर पर आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाती है, जिसमें सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएं भी शामिल हैं। जब रुपया कमजोर होता है, तो इन धातुओं को खरीदने के लिए अधिक भारतीय रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे उनकी घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं।
वैश्विक बाजारों में भी चांदी की धूम
घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चांदी रिकॉर्ड स्तरों के आसपास कारोबार कर रही है। पिछले सात कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत में लगभग 17% की तेज रफ्तार देखने को मिली है। इस तेजी के पीछे अमेरिकी मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीदें और आपूर्ति की कमी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वैश्विक बाजार में चांदी 58 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जबकि सोना 4,200 डॉलर के करीब स्थिर बना हुआ है।
आर्थिक नीतियों का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावित घोषणाओं का वैश्विक बाजार की धारणा पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। इसी सकारात्मक माहौल के बीच, कॉमैक्स पर सिल्वर दिसंबर अनुबंध 1.6% बढ़कर 58.90 डॉलर प्रति औंस और मार्च अनुबंध 59.65 डॉलर प्रति औंस के अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यह रुझान निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहा है, जिससे कीमती धातुओं की मांग और कीमतों में इजाफा हो रहा है।







