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फ़रवरी, 18, 2026
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मुजफ्फरपुर के मंदिरों का कचरा बनेगा कमाई का ज़रिया, उज्जैन मॉडल सीखने जाएगी टीम

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मुजफ्फरपुर न्यूज़: मंदिरों में चढ़ाए गए फूल, जिन्हें अब तक सिर्फ कचरा समझा जाता था, वे अब खुशबूदार अगरबत्ती और उपयोगी उत्पादों में बदलेंगे! कैसे होगा ये कमाल और कौन-सी धार्मिक नगरी दे रही है बिहार के मुजफ्फरपुर को ये नई राह? आइए जानते हैं इस अनोखी पहल के पीछे की पूरी कहानी, जो स्वच्छता और स्वावलंबन का नया अध्याय लिखेगी.

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बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में अब मंदिरों से निकलने वाले सूखे फूल और अन्य जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा. इस नवाचार को ज़मीनी स्तर पर उतारने के लिए मुजफ्फरपुर नगर निगम ने एक अहम कदम उठाया है. नगर निगम की एक सात सदस्यीय टीम को धार्मिक नगरी उज्जैन भेजा जाएगा, जहाँ वे इस खास मॉडल का अध्ययन करेंगे कि कैसे मंदिर के कचरे को मूल्यवान उत्पादों में बदला जा सकता है.

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उज्जैन से सीखेगी ‘कचरे से कंचन’ बनाने की विधि

यह दल सिटी मैनेजर के नेतृत्व में उज्जैन का दौरा करेगा. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य उज्जैन में सफलतापूर्वक चल रहे मंदिर कचरा प्रबंधन और प्रसंस्करण मॉडल को समझना है. विशेष रूप से, टीम यह सीखेगी कि कैसे मंदिरों में चढ़ाए गए सूखे फूलों और अन्य जैविक सामग्री से उच्च गुणवत्ता वाली अगरबत्ती तथा अन्य पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाए जाते हैं.

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उज्जैन, जो अपने प्राचीन मंदिरों और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, ने मंदिर कचरे के निस्तारण का एक प्रभावी और टिकाऊ तरीका विकसित किया है. मुजफ्फरपुर की टीम वहाँ की कार्यप्रणाली, उपयोग की जाने वाली तकनीक, और इस प्रक्रिया में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बारीकी से परखेगी. इसका लक्ष्य मुजफ्फरपुर में भी एक ऐसी ही व्यवस्था स्थापित करना है जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद हो और साथ ही स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर भी पैदा करे.

पर्यावरण संरक्षण और रोज़गार की नई राह

इस पहल से मुजफ्फरपुर को कई मोर्चों पर लाभ मिलने की उम्मीद है. सबसे पहले, यह मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों को स्वच्छ रखने में मदद करेगा, जिससे शहर की सुंदरता और स्वच्छता मानकों में सुधार होगा. दूसरे, कचरे को अगरबत्ती जैसे उत्पादों में बदलकर, नगर निगम कचरा भराव क्षेत्रों पर पड़ने वाले बोझ को कम कर पाएगा.

इसके अतिरिक्त, यह परियोजना स्थानीय महिलाओं या स्वयं सहायता समूहों को अगरबत्ती निर्माण और अन्य उत्पादों को बनाने के लिए प्रशिक्षित कर रोज़गार के नए अवसर प्रदान कर सकती है. यह न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा बल्कि एक चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांत को भी मजबूत करेगा, जहाँ कचरे को संसाधन के रूप में देखा जाता है.

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