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87 अवैध लोन ऐप्स पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 25% तक ब्याज वसूलने और ब्लैकमेलिंग का था आरोप

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नई दिल्ली: क्या आप भी कभी झटपट लोन के चक्कर में किसी ऐप के जाल में फंसे हैं? अगर हाँ, तो ये खबर आपके लिए बेहद ज़रूरी है. जिस रफ्तार से डिजिटल इंडिया बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं. लेकिन अब सरकार ने ऐसे ही एक बड़े गोरखधंधे पर नकेल कसी है.

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भारत सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए 87 लोन देने वाले ऐप्स को बैन कर दिया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत यह आदेश जारी किया है. कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा को दी गई जानकारी में बताया कि यह कार्रवाई विभिन्न स्रोतों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है.

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फर्जी लोन ऐप्स का मकड़जाल ध्वस्त

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सरकार की इस कार्रवाई से उन ऐप्स के संचालन पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी जो न केवल आम लोगों को लुभावने ऑफर देकर फंसाती थीं, बल्कि उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग भी करती थीं. देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें लगातार मिल रही थीं कि ये ऐप्स ग्राहकों से अत्यधिक ब्याज वसूल रही हैं, उनकी निजी जानकारी चुरा रही हैं, और वसूली के लिए ब्लैकमेलिंग जैसे घिनौने हथकंडों का इस्तेमाल कर रही हैं.

आम नागरिकों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगी जो कानूनों का उल्लंघन करता हो. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार डिजिटल दुनिया में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी को भी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार न बनना पड़े.” यह कार्रवाई कंपनी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

25% तक मासिक ब्याज और ब्लैकमेलिंग का खेल

रिपोर्ट्स के अनुसार, ये फर्जी लोन ऐप्स अक्सर ग्राहकों को एक बार जाल में फंसाने के बाद बाहर निकलना नामुमकिन बना देती हैं. कुछ ऐप्स तो हर महीने 25% तक का ब्याज वसूलती हैं. यदि कोई ग्राहक समय पर भुगतान करने में असमर्थ होता है, तो उसे एडिटेड आपत्तिजनक तस्वीरों के साथ ब्लैकमेल किया जाता है. हद तो तब हो जाती है जब इन ऐप्स के संचालक ग्राहक के परिवार वालों और दोस्तों को भी धमकियां देने लगते हैं. यह भी देखा गया है कि कई बार बैन होने के बावजूद ये ऐप्स थोड़े समय बाद नए नामों से या थोड़े बदलाव के साथ फिर से सक्रिय हो जाती हैं, जिससे इनकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है.

सरकार की पैनी नजर

इस बैन के बाद उम्मीद है कि आम लोग ऐसे ऐप्स के झांसे में आने से बचेंगे और अपनी गाढ़ी कमाई को इन धोखेबाजों के हाथों लुटने से बचा पाएंगे. सरकार भविष्य में भी ऐसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और समय-समय पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

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