
नई दिल्ली: दिसंबर की सर्द रातें इस बार और भी खास होने वाली हैं। साल का आखिरी सुपरमून, जिसे ‘कोल्ड मून’ के नाम से भी जाना जाता है, 4 दिसंबर की रात से 5 दिसंबर की सुबह तक आसमान में अपनी पूरी चमक बिखेरेगा। यह खगोलीय घटना अपने अद्भुत नज़ारे के लिए जानी जाती है, क्योंकि सुपरमून सामान्य दिनों की तुलना में बड़ा और अधिक चमकदार दिखाई देता है।
आसमान में सजने वाली है खगोलीय सुंदरता
यह ‘कोल्ड मून’ अपने नाम के अनुरूप, साल की सबसे सर्द रातों में से एक में दिखाई देगा। अपनी विशेष चमक और आकार के कारण, यह खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। पर्यवेक्षकों को यह सामान्य चंद्रमा से काफी बड़ा और अधिक चमकीला प्रतीत होगा, जो रात के आकाश में एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करेगा।
सुपरमून क्या है और यह इतना खास क्यों है?
- सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है (पेरिजी में) और उसी समय पूर्णिमा होती है।
- इस खगोलीय घटना के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 14% बड़ा दिखाई देता है और 30% तक अधिक चमकदार हो सकता है।
- ‘कोल्ड मून’ एक पारंपरिक नाम है जो दिसंबर की पूर्णिमा के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह अक्सर साल के सबसे ठंडे महीने में आता है।
यह खगोलीय घटना आम जनता के लिए अपने घरों से या किसी खुले स्थान से बिना किसी विशेष उपकरण के देखी जा सकती है। बस यह सुनिश्चित करें कि आप शहर की रोशनी से दूर किसी ऐसे स्थान पर हों जहाँ आकाश साफ हो, ताकि आप इस अद्भुत नज़ारे का पूरा आनंद ले सकें। खगोल प्रेमियों के लिए यह साल के अंत में प्रकृति का एक शानदार उपहार है, जिसे चूकना नहीं चाहिए।







