
नई दिल्ली: क्या खत्म हो जाएगा टैक्स का पुराना सिस्टम? यूनियन बजट 2026-27 में बस दो महीने का वक्त बचा है, और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करने की तैयारी में हैं। हर साल की तरह इस बार भी आम जनता को टैक्स से जुड़ी उम्मीदें हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार अब पुराने टैक्स सिस्टम को पूरी तरह से बंद कर देगी? बजट से पहले ये अटकलें तेज हैं कि सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करने पर विचार कर सकती है, खासकर तब जब ज्यादातर टैक्सपेयर्स पहले ही नए टैक्स सिस्टम में शिफ्ट हो चुके हैं।
पुराने टैक्स सिस्टम को हटाने की संभावना पर अटकलें
आंकड़ों पर नजर डालें तो, वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 9.19 करोड़ लोगों ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया था। अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 10 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसमें से 75 फीसदी टैक्सपेयर्स पहले ही नए टैक्स सिस्टम को अपना चुके हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि नए सिस्टम को अपनाने वालों की हिस्सेदारी 80 फीसदी के पार जा सकती है। लेकिन, पुराने टैक्स सिस्टम को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या सरकार इसे पूरी तरह से खत्म कर देगी।
विशेषज्ञों की राय: पुरानी व्यवस्था खत्म होने की संभावना कम
फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने टैक्स सिस्टम को पूरी तरह से खत्म किए जाने की संभावना काफी कम है। इसके पीछे कई ठोस कारण बताए जा रहे हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और बचत की संरचना से जुड़े हैं।
1. देश का बचत ढांचा अभी भी पुरानी व्यवस्था पर निर्भर
ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप भल्ला ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया कि, पुराना टैक्स सिस्टम लंबे समय से भारतीय घरेलू बचत का एक मजबूत आधार रहा है। सेक्शन 80C, 80D और 24(b) जैसे टैक्स डिडक्शन लोगों को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF), जीवन बीमा, पेंशन प्लान और होम लोन जैसी चीजों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि, इन प्रोत्साहनों को अचानक से हटा देने से भारतीय बचत दर कमजोर हो सकती है। साथ ही, लाखों लोगों की रिटायरमेंट प्लानिंग पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
2. कैश फ्लो अभी भी कैश संबंधी उत्पादों पर आधारित
संदीप भल्ला के अनुसार, भारत के मिडिल क्लास का एक बड़ा हिस्सा अपनी वित्तीय योजनाएं टैक्स बचाने की मंशा से बनाता है। बहुत से लोगों ने टैक्स लाभ को ध्यान में रखकर ही लॉन्ग-टर्म होम लोन, इंश्योरेंस पॉलिसी और पेंशन जैसी योजनाओं का चुनाव किया है। इन टैक्स व्यवस्थाओं में अचानक बदलाव से इन योजनाओं के प्रवाह में रुकावट आ सकती है, और लोगों में असंतोष की भावना भी पैदा हो सकती है।
3. दोहरी व्यवस्था अर्थव्यवस्था को देती है स्थिरता
उन्होंने आगे कहा कि, अर्थव्यवस्था में दोहरी कर व्यवस्था (Dual Framework) अचानक आने वाले व्यवहारिक झटकों (Behavioral Shocks) से बचाव का काम करती है। नए सिस्टम के साथ-साथ पुराने सिस्टम को बनाए रखने से लोगों और संस्थानों का भरोसा बना रहता है। बिजनेस और फाइनेंशियल संस्थान भी मौजूदा व्यवस्थाओं को जारी रखना पसंद करते हैं। अचानक से पुराने सिस्टम को खत्म करने से कानूनी और प्रशासनिक विवाद बढ़ सकते हैं।
4. मौजूदा व्यवस्था को संभालना आसान
जोतवानी एसोसिएट्स के एडवोकेट शरण्य त्रिपाठी के अनुसार, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पहले से ही दोनों टैक्स सिस्टम के तहत रिटर्न फाइलिंग को आसानी से संभाल रहा है। पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करने के लिए कई कानूनों और नियमों में बदलाव करने होंगे, जिससे विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए, मौजूदा दोहरी व्यवस्था को बनाए रखना फिलहाल अधिक व्यावहारिक लगता है।
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