

बिहार न्यूज़: बिहार में जमीन-मकान की रजिस्ट्री कराना अब सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि एक नए, आधुनिक युग की शुरुआत होने जा रही है। सरकार एक ऐसी व्यवस्था बनाने जा रही है, जहां रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस होगी। इस बड़े बदलाव को सुचारू और त्रुटिरहित बनाने के लिए दशकों का अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी बतौर परामर्शी शामिल किया जा रहा है, ताकि उनके विशेषज्ञ मार्गदर्शन का पूरा लाभ उठाया जा सके। आखिर क्या है सरकार की यह नई रणनीति, और कैसे यह लाखों लोगों के लिए जमीन-जायदाद के लेनदेन को आसान बनाएगी?
पेपरलेस निबंधन की नई नियमावली
बिहार सरकार ने जमीन और मकान के निबंधन (रजिस्ट्री) की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का फैसला किया है। इसके तहत एक नई निबंधन नियमावली तैयार की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस बनाना है। इस कदम से न केवल कागजी कार्रवाई कम होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और आम जनता को अनावश्यक दौड़-भाग से मुक्ति मिलेगी। यह नई व्यवस्था तकनीकी और प्रशासनिक दक्षता का एक बेहतरीन संगम होगी, जिससे रजिस्ट्री से संबंधित कार्यों में गति आएगी और गलतियों की गुंजाइश भी कम होगी।
सेवानिवृत्त अधिकारियों का अहम योगदान
इस महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कार्य में विशेषज्ञ मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक दूरदर्शी फैसला लिया है। सेवानिवृत्त पदाधिकारियों को परामर्शी (कंसलटेंट) के रूप में इस प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इन अधिकारियों के पास निबंधन के क्षेत्र में दशकों का अनुभव है, जिसका उपयोग नई पेपरलेस प्रणाली को लागू करने और उससे जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने में किया जाएगा। उनका यह अनुभव न केवल नई नियमावली को व्यावहारिक रूप देने में मदद करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि नई प्रणाली जनता के लिए सहज और सुलभ हो।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
- पारदर्शिता: पेपरलेस प्रक्रिया से हेराफेरी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।
- दक्षता: ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रिया से काम तेजी से होगा।
- सुविधा: आम लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।
- अनुभवी मार्गदर्शन: सेवानिवृत्त अधिकारियों का अनुभव जटिल मामलों को सुलझाने में सहायक होगा।
सरकार का यह कदम बिहार में भू-संपत्ति के निबंधन को लेकर एक नई मिसाल कायम करेगा, जिससे राज्य में निवेश और विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और किस तरह से यह आम लोगों के लिए जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों को और सरल बनाती है।


