
नई दिल्ली: नवंबर की 21 तारीख से देश में लागू होने जा रहे नए श्रम कानून आपकी सैलरी, पीएफ और ग्रेच्युटी के गणित को पूरी तरह बदलने वाले हैं। अगर आप भी नौकरीपेशा हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। नए वेज कोड के लागू होने के बाद आपकी टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए आपके रिटायरमेंट फंड यानी पीएफ और ग्रेच्युटी में इजाफा होगा। आइए, समझते हैं कि इस बदलाव का आपकी सैलरी स्लिप पर क्या असर पड़ेगा।
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
अब तक, कई कंपनियां अपनी कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ाने के लिए बेसिक सैलरी का हिस्सा कम रखती थीं और बाकी अलाउंसेस (जैसे HRA, कन्वेयंस अलाउंस) के रूप में देती थीं। इसका सीधा फायदा यह होता था कि आपकी हाथ में आने वाली सैलरी ज्यादा दिखती थी। लेकिन, नए वेज कोड के लागू होने के बाद यह तरीका काम नहीं करेगा। नए नियमों के मुताबिक, आपकी बेसिक सैलरी (बेसिक वेजेज) कुल सीटीसी (कॉस्ट-टू-कंपनी) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है। इसमें डियरनेस अलाउंस (DA) और रिटेनिंग अलाउंस भी शामिल होंगे।
अलाउंसेज पर लगेगी लगाम
नए नियमों के तहत, सभी तरह के अलाउंसेज (जैसे HRA, स्पेशल अलाउंस, कन्वेयंस अलाउंस आदि) मिलाकर आपकी सीटीसी के 50% से अधिक नहीं हो सकते। अगर कोई कंपनी इससे ज्यादा अलाउंसेज देती है, तो अतिरिक्त राशि को बेसिक सैलरी में जोड़ा जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि आपकी बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ेगा।
पीएफ और ग्रेच्युटी में होगा इजाफा
चूंकि अब बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ेगा, तो उसका सीधा असर प्रॉविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी की गणना पर पड़ेगा। पीएफ और ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। इसलिए, बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी में भी बढ़ोतरी होगी। यह आपके रिटायरमेंट के समय एक बड़ी रकम सुनिश्चित करेगा।
टेक-होम सैलरी पर क्या होगा असर?
जहां एक ओर पीएफ और ग्रेच्युटी जैसे लॉन्ग-टर्म बेनिफिट्स बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर आपकी टेक-होम सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बेसिक सैलरी का बड़ा हिस्सा पीएफ में कट जाएगा, और बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ कंट्रीब्यूशन भी बढ़ जाएगा। हालांकि, टैक्स प्लानिंग के नजरिए से यह बदलाव फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि टैक्स की गणना अक्सर कुल आय पर होती है, जिसमें अलाउंसेज का एक हिस्सा टैक्स-फ्री भी हो सकता है।
क्या हैं नए श्रम कानून?
केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया है – मजदूरी पर संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर संहिता, 2020; और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020। नए वेज कोड का उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के बीच मजदूरी के अंतर को कम करना है।







