

मुज़फ्फरपुर न्यूज़: मुज़फ्फरपुर के एक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने पहुंचे एक बुजुर्ग के साथ ऐसा कुछ हुआ जिसने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्हें दवा के नाम पर ऐसी चीज़ दी गई, जिसका इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है। क्या है पूरा मामला और किसने की ये गंभीर लापरवाही?
मुज़फ्फरपुर के मुशहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारी के अनुसार, यहां इलाज के लिए पहुंचे एक बुजुर्ग मरीज को गंभीर लापरवाही का शिकार होना पड़ा। उन्हें इलाज के नाम पर ऐसी दवा दे दी गई, जिसकी मियाद खत्म हो चुकी थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग मरीज जब दवा लेने पहुंचे, तो उन्हें खांसी या किसी अन्य सामान्य बीमारी के लिए सीरप दी गई। लेकिन, घर जाकर जब परिजनों ने दवा की बोतल देखी, तो उनके होश उड़ गए। बोतल पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी डेट’ अंकित थी, जो काफी पहले ही निकल चुकी थी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना न सिर्फ मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पीएचसी में दवाओं के स्टॉक और उनके वितरण में कितनी बड़ी चूक हो रही है। एक्सपायर हो चुकी दवाओं का वितरण सीधे तौर पर मरीजों की जान को जोखिम में डालना है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायर दवाओं का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसी दवाओं से साइड इफेक्ट्स का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, और ये दवाएं अपनी प्रभावशीलता भी खो देती हैं, जिससे मरीज को कोई फायदा नहीं होता।
जांच और कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों में भारी आक्रोश है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। पीएचसी में दवाओं के स्टॉक की नियमित जांच और फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण के समय पूरी सावधानी बरतना अनिवार्य है। यह घटना दर्शाती है कि इस प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।
अधिकारियों की चुप्पी और आगे की राह
हालांकि, इस मामले पर अभी तक स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर संज्ञान लिया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है और यह भी याद दिलाती है कि दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी निगरानी और जवाबदेही की मोहताज हैं।



